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तेल उत्पादक देशों पर बरसे पी. चिदंबरम

ई देशों में बढ़ रही अन्न और तेल की कीमतों से निपटने के लिए भारत वैश्विक स्तर पर आम सहमति चाहता है। भारत ने चेतावनी दी है कि अगर इस समस्या पर तुरंत काबू नहीं पाया गया तो यह किसी संक्रामक रोग की तरह दुनिया भर में फैल जाएगी। वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की विकास समिति की 77वीं बैठक में कहा, ‘हमें मूल्य वृद्धि पर वैश्विक सहमति कायम करनी चाहिए, नहीं तो कुछ देशों में तेजी से बढ़ रही अनाज की कीमतें जल्द ही सामाजिक समस्या पैदा कर देंगी और इसका संक्रमण पूरी दुनिया में हो जाएगा। विकसित या विकासशील कोई देश इसकी चपेट से बच नहीं पाएंगे। विश्व समुदाय को चाहिए कि वह पूरी एकाुटता से इस समस्या का निदान खोजे अन्यथा गरीब देशों को सहायता, व्यापार या ऋण से मिली मदद भी इससे बेअसर साबित हो सकती है।’ चिदंबरम ने तेल उत्पादक देशों पर अपना गुस्सा उतारते हुए कहा कि 110 डालर प्रति बैरल की ऊंचाई पर चल रहे कच्चे तेल के दाम किसी भी लिहाज से उचित नहीं माने जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के दाम जिस तरह बढ़ रहे हैं, वह न तो इसकी सही उत्पादन लागत है और न ही बाजार में मांग और आपूर्ति की सही स्थिति को परिलक्षित करता है। उन्होंने तेल उत्पादक देशों से कहा कि वह उत्पादन प्रबंधन और मूल्य नीति पर गंभीरता से विचार कर तेल आयात से गरीब देशों पर पड़ने वाले बोझ का भी ध्यान रखें। चिदंबरम ने कहा कि कच्चे तेल और खाद्यान्नों के बढ़ते दाम से विकासशील देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने अमेरिका का नाम लिए बिना ही उसकी भी इस बात के लिए आलोचना कर डाली कि यहां ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत को विकसित करने के लिए गेहूं और मक्का का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। चिदंबरम ने कहा कि ऊर्जा और उर्वरक के दाम बढ़ने से ही दुनिया में खाद्यान्नों के दाम बढ़े हैं और इससे भी बढ़कर यह कि अनाज की फसलों का इस्तेमाल जैव ईंधन के लिए किया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि जिस दुनिया में गरीबी और भुखमरी के मारे लोग हों, वहां अनाज का इस्तेमाल जैव ईंधन के लिए किया जाना कतई न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। वित्त मंत्री ने माना कि जब तक कोई गंभीर प्रयास नहीं किया जाता, गरीबों पर सबसे ज्यादा असर डालने वाली खाद्यान्न की कीमतें फिलहाल उच्चस्तर पर ही बने रहने की आशंका है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में जैव ईंधन की मांग बढ़ेंगी और ऊर्जा तथा उर्वरक के दाम भी ऊंचे बने रहेंगे। उन्होंने विकसित देशों से जैव ईंधन के उत्पादन पर अनाज फसल को मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न को ईंधन में बदलना गरीबों के लिए ठीक नहीं है और पयार्वरण के लिहाज से भी नुकसानदायक होगा। चिदंबरम ने इस संबंध में विश्व बैंक के अध्यक्ष जोएलिक के नए सिरे से वैश्विक खाद्य नीति बनाए जाने के आह्वान का स्वागत किया।

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  • Web Title: तेल उत्पादक देशों पर बरसे पी. चिदंबरम