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पटना जंक्शन: सबकुछच ठीकठाक नहीं

पटना जंक्शन पर विभिन्न कारणों से यात्री रोाना फाीहत झेलने को मजबूर होते हैं। इन कारणों में मशीनों की तकनीकी खराबी व कर्मियों का व्यवहार प्रमुख है। आये दिन इसकी लिखित व मौखिक शिकायत लेकर यात्री रलवे अधिकारियों के पास पहुंचते हैं। प्लेटफॉर्मों पर लगे कोच इंडिकेटर, पूछ-ताछ काउंटर ऊपर स्थापित डिस्प्ले बोर्ड व उद्घोषणा प्रणाली में गड़बड़ी से यात्री अक्सर धोखा खा जाते हैं। इसके अलावा रलकर्मियों का असहयोगात्मक व्यवहार भी यात्रियों को परशान करता है। हालांकि यात्री यह भी बताते हैं कि रल प्रशासान की सख्ती के बाद सुविधाओं व कर्मियों के व्यवहार में बदलाव आया है, पर इसमें और सुधार होनी चाहिए।ड्ढr ड्ढr सोमवार को इस तरह के कई मामले प्रकाश में आए। पटना-इंदौर एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास के यात्री के टिकट पर बर्थ नंबर कुछ और था और आरक्षण चार्ट में कुछ और। पी पराशर नामक यात्री के टिकट पर बोगी नंबर एस 7, सीट संख्या 68 अंकित था। आरक्षण चार्ट में सीट नंबर 76 के सामने उनका नाम अंकित था। इस संबंध में अधिकारी ने बताया कि स्लीपर क्लास की नयी बोगी में 81 सीटें हैं। कंप्यूटर द्वारा 72 सीटों वाली बोगियों के आधार पर टिकट निकलता है, जिनमें 72 सीटें होती हैं। इस कारण यह परशानी हो रही है। इसी प्रकार पूर दिन उद्घोषणा यंत्र से ट्रेन का नाम व नंबर धीमी आवाज में बताया गया। यात्रियों को बार-बार पूछ-ताछ काउंटर पर जानकारी लेने जाना पड़ रहा था। इन्कम टैक्स विभाग के पूर्व अधिकारी आर प्रसाद ने डिप्टी एसएस (वाणिज्य) से शिकायत की कि करबिगहिया परिसर के एक बुकिंग क्लर्क ने उनके साथ अभर्द व्यवहार किया और पटना से इस्लामपुर तक मगध एक्सप्रेस के रद्द रहने के बावजूद उन्हें फुल रिफंड नहीं किया गया। हालांकि शिकायत के बाद बुकिंग के एक प्रभारी को बुलाकर यात्री का पैसा वापस कर दिया गया।

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