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बिजली की कमी दूर करने का प्रयास करंगे रामाश्रय

ऊर्जा मंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने कहा है कि वे ऊर्जा प्रक्षेत्र की चुनौतियों को स्वीकार करते हैं और राज्य को ऊर्जा प्रक्षेत्र में नई ऊंचाई पर ले जाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करंगे। मुख्यमंत्री ने जो विश्वास और भरोसा उनपर किया है, उसे पूरा करने के लिए वे पूरी ईमानदारी से प्रयास करंगे। बतौर ऊर्जा मंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह अपनी दूसरी पाली खेलेंगे। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिहार बिजली की भारी कमी से जूझ रहा है और इस कमी को दूर करना बड़ी चुनौती होगी। नीतीश सरकार में ऊर्जा प्रक्षेत्र में कई अच्छे कार्य हुए हैं और अभी भी बहुत कुछ किया जाना है। बिहार में बिजली उत्पादन की स्थिति बदतर है और इसके लिए नए सिर से काम किया जाना है। ऐसे में वे योजनाबद्ध ढंग से ऊर्जा प्रक्षेत्र में काम करंगे। ऊर्जा मंत्री ने मंगलवार को ऊर्जा विभाग से सम्बद्ध सभी बोर्ड-निगमों और अन्य संभागों की बैठक बुलाई है। बैठक में बिहार बिजली बोर्ड, बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्िट्रक पावर कारपोरशन (बीएचपीसी) और बड्रा के अधिकारी शामिल होंगे। परिवहन विभाग की कमियों व समस्याओं को खत्म करंगे रामानंदड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। परिवहन मंत्री रामानन्द सिंह ने विभाग की कमान मिलने के साथ ही अपने लिए दो लक्ष्य निर्धारित किये हैं। पहला, विभाग से लेकर जिला परिवहन कार्यालयों तक की गड़बड़ियों को दुरुस्त करना। दूसरा, राजस्व को बढ़ाकर राज्य के विकास में योगदान करना। श्री सिंह मंगलवार को शुभमुहूर्त में पदभार ग्रहण करंगे। उनपर स्मार्ट कार्ड लाइसेंस परियोजना और हाई सिक्यूरिटी नम्बर प्लेट योजना को लागू कराने का भी जवाबदेही होगी। नयी जिम्मेदारी और अपनी प्राथमिकताओं के संबंध में पूछे जाने पर श्री सिंह जवाब देते हैं, अभी-अभी तो आए हैं..। थोड़ा रुककर फिर अचानक कहते हैं, परिवहन विभाग की गड़बड़ियां किसी से छिपी थोड़े ही हैं। सबसे पहले तमाम कमियों और समस्याओं को खत्म करना होगा। राज्य के विकास में योगदान के लिए परिवहन विभाग के राजस्व को बढ़ाना भी जरूरी है। इसके लिए तमाम व्यावधानों को जड़ से काट कर समाप्त करना होगा। कृषि को उद्योग का दर्जा दिलाने को केंद्र पर दबाव बनाएंगे नागमणिड्ढr पटना(हि. ब्यू.)। राज्य के नये कृषि मंत्री नागमणि ने अपने विभाग का प्रभार तो अभी नहीं संभाला है लेकिन कृषि को उद्योग का दर्ज दिलाने की चिंता उन्हें आज से ही सताने लगी है। उनका मानना है कि कृषि को उद्योग का दर्जा दिये बिना किसानों की बेहतरी के बार में सोचना बहुत फलदायी नहीं होगा। इसके लिए वे न सिर्फ सार्थक प्रयास करंगे बल्कि इसका प्रारूप तैयार कर केन्द्र पर दबाव भी बनाएंगे। मंत्री मंगलवार को अपने विभाग का काम संभाल लेंगे। पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हर वाजिब सुविधा मिलेगी लेकिन उन्हें रिाल्ट भी देना होगा, वह भी निर्धारित समय पर। उन्होंने कहा कि योजनाएं किसान हितों को ध्यान में रखकर बनेंगी और इसकी अनदेखी करने वाले परशानी में पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि चालू वर्ष को मुख्यमंत्री ने कृषि वर्ष घोषित किया है ऐसे में उनके विभाग की जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। विभाग की सारी योजनाओं का लाभ किसानों तक समय पर पहुंचे यह उनकी पहली जिम्मेदारी होगी। उाियारपुर संसदीय निर्वचन क्षेत्र से उनकी दावेदारी के बार में पूछे जाने पर उन्होंने कहा ‘ इसमें ना का कहां प्रश्न है, उस क्षेत्र को हमने सींचा है। विधायक मद की राशि को उसी क्षेत्र में खर्च किया है ।’ड्ढr नीतीश कुमार द्वारा बनाई गई नई टीम को उन्होंने संतुलित बताया। रातोंरात ‘सत्ता के गलियार’ की राजनीति का फामरूला बदलाड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। नीतीश मंत्रिमंडल के पहले महाफेरबदल ने रातोंरात ‘सत्ता के गलियार’ की राजनीति का फामरूला ही बदल दिया है। सेटिंग-गेटिंग पर भरोसा करने वालों की जमात रविवार की रात से ही नये-नये मंत्रियों से संपर्क के सूत्र तलाशने में जी-जान से जुट गयी। घर के पते से लेकर मोबाइल नम्बर तक की जानकारी जुटाने के साथ नये मंत्रियों का बैकग्राउंड तक पता किया जा रहा है। ऐसे खास किस्म के तत्वों में सरकारी महकमों के कर्मचारी-पदाधिकारी ही नहीं, कुछ ‘बाहर’ वाले भी शामिल हैं जो जल्द से जल्द मंत्रियों संग गोटी सेट करने को आतुर हैं। आखिरकार दस मंत्रियों को बाहर का दरवाजा दिखाये जाने समेत सभी मंत्रियों के विभाग बदल जाने से उन लोगों को करारा झटका लगा है जो ‘अपनी जान-पहचान है’ कहकर काम कराने का दावा ठोकते हुए घूमते रहते हैं। ऐसे कई शख्स तो माला-मिठाई के साथ समर्थक का चोला पहनकर बधाई देने के लिए ‘मंत्री जी’ के विधायक केटेगरी वाले आवास में इंट्री भी दर्ज करा चुके हैं।हरक की कोशिश यही कि किस तरह मंत्री तक पहुंचा जाए? किसको सीढ़ी बनाया जाए? मौका मिलते ही वे मंत्री के करीबी जैसे दिखने वाले लोगों से ‘सवाल-जवाब’ करने से भी नहीं चूकते, इस उम्मीद में कि न जाने किस रूप में मिल जायें भगवान! और एकबार भगवान मिल गये तो पक्का समझो अपना बेड़ा पार।

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  • Web Title: चुनौतियों पर मंत्रियों की प्रतिक्रिया