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प्रदेश राजद अलबेला आठ माह से कमेटी नहीं

प्रदेश राजद का हाल अलबेला है। आठ महीने हो गये, कमेटी का गठन नहीं हुआ। संगठन के लोग कुनमुना कर रह जाते हैं। विधायकों को भी इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। कमेटी के नहीं होने पर भी पाटी में आतंरिक बैठक, चर्चा होती है। कार्यक्रम भी बनते हैं। इसमें प्रदेश के प्रमुख पदाधिकारियों को बुलाया जाता है। चेहर और नाम जाने हुए हैं। नेता- कार्यकर्ता मन मसोस कर रह जाते हैं। पिछले साल अगस्त में गौतम सागर राणा दोबारा प्रदेश अध्यक्ष चुने गये थे। राष्ट्रीय स्तर और बिहार में कमेटी का गठन चुनाव के तुरंत बाद ही हो गया। चर्चा होने लगी कि पार्टी में राणा ही सब कुछ हैं।ड्ढr प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा इस मामले में पूछने पर जवाब देंगे, बहुत जल्द कमेटी का गठन हो जायेगा। इस बार भी ऐसा ही कहा है। राणा के मुताबिक पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद को पूरी स्थिति की जानकारी दी गयी है। वैसे प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से सांगठनिक गतिविधियों और कार्यक्रमों में राणा हमेशा व्यस्त होते हैं। जिलों का दौरा भी करते हैं, लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी के बिना किसी पार्टी में सांगठनिक ढांचा की बात बेमानी है। दो महीने तो पार्टी की चेतना रैली के इर्द-गिर्द ही निकल गये।ड्ढr पिछले साल कमेटी गठन के साथ प्रदेश अध्यक्ष पार्टी में निशाने पर आ गये थे। राजद हलके से मिली जानकारी के मुताबिक इस बार भी नाम को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। कई वैसे लोग भी प्रदेश कमेटी में जगह चाहते हैं, जिन्हें पार्टी से कोई मतलब नहीं। वैसे भी कई लोग हैं, जो राजद और लालू के नाम पर जीते-मरते हैं। राणा संगठन चलाने में अनुभवी और जानकार हैं। लेकिन कमेटी नहीं होने से पार्टी की बेचारगी साफ दिखती है।ड्ढr

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