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.तो लड़कों को नहीं मिलेगी दुल्हन

सूबे में लड़के और लड़कियों की संख्या का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। मतलब लिंगानुपात की स्थिति में निरंतर गिरावट आ रही है। अगर यह संतुलन इसी तरह बिगड़ता रहा और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक नहीं लगी, तो आनेवाले समय में लड़के दुल्हन के लिए तरसेंगे। आंकड़ों के अनुसार देश में एक वर्ष में 20 लाख से ज्यादा भ्रूण हत्याएं हो रही हैं। इसका मुख्य कारण लड़कियों की तुलना में लड़कों तराीह देना है।ड्ढr प्रसव पूर्व एमानो सेंटोसिस, अल्ट्रासाउंड और कोरियन बायोप्सी जसी तकनीक के दुरुपयोग ने समस्या खड़ी कर दी है। पीएनडीटी एक्ट के लागू होने के बावजूद राज्य के कई जिलों का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से भी कम है। धनबाद में प्रति एक हाार पुरुष पर 847 महिलाएं, बोकारो में 8और देवघर में 0 महिलाएं हैं। सबसे कम लिंगानुपात हाारीबाग का है। यहां प्रति हाार पुरुष पर महिलाओं की संख्या 833 है। झारखंड में जन्म निबंधन दर अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। सूबे में सिर्फ 2.ीसदी लोग ही अपने बच्चों के जन्म का निबंधन कराते हैं। रांची में सबसे अधिक चार फीसदी, हाारीबाग में 0.7, कोडरमा में एक, लोहरदगा में 1.1, गुमला में 0.8 और धनबाद में 2.1 फीसदी लोग ही जन्म का निबंधन कराते हैं।

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