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स्वाति की बदरंग जिंदगी में भरा रंग

तेजी से बदलते वक्त में लीक से हटकर फैसले लेना और उसे निभाना सबके वश की बात नहीं। लेकिन यदि जज्बा हो तो आप भी दूसरों की जिंदगी में खुशहाली ला सकते हैं। ऐसी ही एक मिसाल हैं मलय भारती। पेशे से प्रिंसिपल मलय ने एक विधवा स्वाति से ब्याह रचाकर उनकी सूनी जिंदगी में इंद्रधनुष के रंग भर दिये हैं। उन्होंने सिर्फ स्वाति को ही नहीं अपनाया, बल्कि उनकी चार साल की बेटी तन्वी को भी पिता का प्यार दे रहे हैं। स्वाति के पहले पति विनय भारती डीएसपी थे। इन दोनों की शादी वर्ष 1में हुई थी। लेकिन उग्रवादियों से लोहा लेते हुए विनय शहीद हो गए। स्वाति की जिंदगी वीरान हो गई। स्वाति के पिता ए के सिंह एचइसी में काम करते थे। धुर्वा सेक्टर पांच में उनका पूरा परिवार रहता है। उनकी मां डॉ. रांना सिंह रांची में डॉक्टर हैं। जब स्वाति की शादी हुई, तब विनय चतरा के एसडीपीओ थे। ईमानदार और जूझारू अधिकारी विनय को खबर मिली कि कुंदा में उग्रवादियों ने बंकर बना रखा है। फिर क्या था, आठ अक्तूबर 2005 को उन्होंने उग्रवादियों पर हमला बोल दिया, जिसमें गोली लगने से उनकी जान चली गई।ड्ढr इस विकट घड़ी में स्वाति की जिंदगी में साहेबगंज के प्राध्यापक मोहन प्रसाद एक फरिश्ते की तरह आये। उन्होंने दुनिया की परवाह किये बिना अपने बेटे मलय भारती की शादी स्वाति से कर दी। स्वाति को भी गृह विभाग में नौकरी मिल गयी है। नेपाल हाउस के पीछे इनका घर है और वह एक खुशहाल जीवन जी रही हैं। स्वाति कहती हैं कि उनके ससुराल वाले देवता से भी बढ़कर हैं। मलय तो महान हैं। मलय की तैनाती हाल ही में घाटशिला महाविद्यालय में प्रिंसिपल के रुप में हुई है।ड्ढr

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