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महंगाई पर राज्यों के पाले में गेंद डालने की तैयारी

लगातार बढ़ती महंगाई के भंवर में फंसी केंद्र की यूपीए सरकार अब अकेले इस संकट को झेलने की बजाय गेंद राज्यों के पाले में सरकाने की तैयारी में है। इसके लिए राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत स्टॉक सीमा तय कर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक स्टील जसे उत्पादों को छोड़कर अधिकांश उत्पादों के मामले में केंद्र सरकार जरूरी कदम उठा चुकी है। उसके पास प्रशासनिक कदमों के रूप में ज्यादा कुछ करने को नहीं बचा है। दूसरी ओर मंगलवार को पूर दिन कीमतों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपी) की बैठक की अटकलें लगती रहीं। संबंधित मंत्रालयों में सूत्रों के साफ किया कि इस तरह की कोई बैठक मंगलवार के लिए तय ही नहीं थी। बैठक कब होगी, यह अभी तय नहीं है। वैसे, सीसीपी की बैठक कुछ घंटों के नोटिस पर भी होती रही है।केंद्र सरकार ने पिछली सीसीपी बैठक में खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क में भारी कटौती के साथ कई खाद्य उत्पादों के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। खाद्य तेलों की कीमतों में आई कमी में इन फैसलों का असर भी दिखा है। खाद्यान्न कीमतों पर अंकुश के लिए चालू रबी सीजन में गेहूं की खरीद करने वाले निजी क्षेत्र के संस्थानों पर रिटर्न जमा करने की शर्त भी लागू की है। इस प्रक्रिया में राज्यों को शामिल किया गया है। केंद्र ने राज्यों को साफ कर दिया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत वह जरूरी वस्तुओं पर स्टॉक सीमा लगाकर कदम उठाएं। कुछ राज्यों ने इस पर अमल भी शुरू कर दिया है। लेकिन व्यापारियों की करीबी समझी जाने वाली भाजपा द्वारा शासित राज्यों में इस तरह के कड़े कदमों का केंद्र को इंतजार है। बुधवार को जब संसद में महंगाई पर बहस शुरू होगी तो केंद्र राज्यों के सिर पर भी ठीकरा फोड़ने की कोशिश कर सकता है। स्टील और कुछ दूसर उत्पादों के बार में कुछ कदम जरूर उठाये जाएंगे। इसमें उत्पाद शुल्क में कटौती के साथ निर्यात पर पांच फीसदी शुल्क लगाने की सिफारिश की गई है। लौह अयस्क पर भी निर्यात शुल्क बढ़ाने के लिए भी कहा है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में वित्त मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय के बीच कुछ मतभेद हैं।

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  • Web Title: महंगाई के मामले में राज्यों पर दोष