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महंगी पड़ी केंद्र को महंगाई

यूपीए सरकार के चार साल के कार्यकाल में महंगाई व मुद्रास्फीति का ऐसा साझा मुद्दा वाम दलों व विपक्ष के हाथ लगा है, जिसमें संसद में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह अलग- थलग पड़ गई। वाम दलों और सपा- टीडीपी ने हवीपी हाऊस से संसद तक सरकार की महंगाई के खिलाफ विरोध मार्च की आंच ने अगले सप्ताह संसद में वित्त विधेयक पर वाम समर्थन जुटाने के लिए सरकार पर दवाब बढ़ा दिया। हंगामे व शोर- शोर शराबे ने लोकसभा को 11.30 बजे ही ठप कर दिया जबकि भोजनावकाश के पहले ही राज्यसभा भी स्थगित हो गई। राज्यसभा में नए सांसदों को शपथ ग्रहण व प्रधानमंत्री द्वारा अपने मंत्रियों की टीम का परिचय कराने की औपचारिकता के बाद ही वाम- यूएनपीए व एनडीए सदस्यों के हंगामें के बाद कोई काम नहीं हुआ। सुबह संसद के भवन के मुख्य गेट के बाहर महंगाई के खिलाफ यूएनपीए के धरने में वाम सांसद भी शरीक हुए। माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि जिन कारणों से महंगाई बढ़ी है, उनसे सबक लेते हुए सरकार कुछ ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि हम संसद में बहस चाहते हैं। माकपा सांसद मोहमद सलीम ने कहा कि सरकार सस्ते गल्ले की दूकानों से राशन वितरण की व्यवस्था को दुरस्त करे। जमाखोरी के खिलाफ कड़े कदम उठाए व कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए हमारे सुझावों पर फौरन अमल करे। सपा महासचिव अमर सिंह ने धरने पर मीडिया से बातचीत में कहा कि महंगाई के खिलाफ जनता के आक्रोश को स्वर देने के लिए हम वाम दलों के साथ एकजुट हैं।

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