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समुद्र में कौन करता है पूजा : सुप्रीम कोर्ट

सेतु समुद्रम परियोजना से हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक राम सेतु को बचाने का अभियान धीर धीर धार्मिक और राजनीतिक रंग लेने लगा है। इसके संकेत मंगलवार को उस समय साफ नजर आये जब सुप्रीम कोर्ट में राम सेतु को धार्मिक आस्था का प्रतीक बताते हुये यहां आज भी पूजा अर्चना किये जाने की दलीलें दी गईं, वहीं न्यायाधीशों ने भी जानना चाहा कि समुद्र के बीच स्थित इस सेतु पर कौन पूजा करता है? सेतु समुद्रम परियोजना से राम सेतु को बचाने के लिये संघर्षरत जनता पार्टी के नेता सुब्रमणियम स्वामी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इसे पूजा अर्चना का एक पवित्र स्थान स्थान बताया तो न्यायाधीशों ने तत्परता से सवाल किया कि वहां कौन पूजा करने जाता होगा? न्यायाधीशों का कहना था कि उन्हें विश्वास नहीं होता कि समुद्र के बीच में स्थित राम सेतु पर लोग पूजा अर्चना करते होंगे। इस पर डा. स्वामी ने कहा कि वह स्वंय हर साल वहां पूजा करते हैं। इसके अलावा देश विदेश से बड़ी संख्या में श्रृद्धालु पूजा अर्चना के लिये पहुंचते हैं। डा. स्वामी का तर्क था कि राम सेतु पर पूजा के सवाल पर यह आपका (न्यायाधीशों का) नजरिया हो सकता है लेकिन वास्तविकता तो यही है कि वहां पूजा अर्चना होती है और सरकार भी इसे एक पवित्र स्थल ही मानती है। इस मामले में पूर्व कानून मंत्री अरुण जेतली और वरिष्ठ अधिवक्ता के. के. वेणुगोपाल का कहना था कि राम सेतु के पुरातात्विक और प्राचीन धरोहर के बार में पुरातत्व विभाग के विस्तृत अध्ययन के अभाव में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। ाी जेतली का कहना था कि मद्रास हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद सास्कृतिक मंत्रालय हलफनामा दाखिल नहीं कर रहा है। इस मामले पर अब सुनवाई 2से होगी। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक मंत्रालय के जरिये पुरातत्व सव्रेक्षण विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल भी किया था लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 31 अगस्त को केन्द्र सरकार और सेतु समुद्रम कार्पोरशन को इस परियोजना पर काम जारी रखने की सशर्त अनुमति थी।

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