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महंगाई पर संसद ठप

बढ़ती महंगाई की गूंज मंगलवार को संसद में भी सुनाई दी। इस मुद्दे पर वामदलों, यूएनपीए के प्रमुख घटकों और भाजपा नीत संपूर्ण विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बिना कोई विधायी कामकाज निबटाए पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। करीब 25 दिन के अंतराल पर दोनों सदनों की कार्यवाही फिर शुरू होने पर संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों ने सांसत में डाला जिन्होंने विपक्ष व यूएनपीए के साथ मिल कर महंगाई के मुद्दे पर जबर्दस्त नारेबाजी करते हुए कार्यवाही नहीं चलने देने का अपना इरादा जाहिर कर दिया। वामपंथी पार्टियों ने प्रश्नकाल स्थगित कर महंगाई पर चर्चा कराने की जोरदार मांग उठाई।ड्ढr ड्ढr लोकसभा में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल सात नए मंत्रियों का परिचय कराए जाने और राज्यसभा में नए सदस्यों के शपथ लेने के बाद महंगाई को लेकर सदस्यों का आक्रोश उबल पड़ा। समाजवादी पार्टी के सदस्य अध्यक्ष के आसन के पास आकर महंगाई रोकने में विफलता के लिए सरकार के इस्तीफे की मांग करने लगे। अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने कार्यवाही क्रमश: साढ़े 11 और दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यसूची में मंगलवार को माकपा नेता वासुदेव आचार्य तथा सी के चंद्रप्पन की नोटिस पर नियम 1े तहत आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में निरंतर वृद्धि से उत्पन्न स्थिति तथा सरकार द्वारा इस संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में चर्चा प्रस्तावित थी। लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों को इसका हवाला देकर शांत करने की कोशिश की लेकिन राजग सदस्यों के निरंतर शोर के बीच यूएनपीए के प्रमुख घटक सपा, तेदपा तथा वामपंथी दलों के कुछ सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने एकत्र होकर नारेबाजी करने लगे। चटर्जी ने सदस्यों को नारेबाजी रोकने तथा उन्हें अपनी सीटों पर जाकर सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन में सहयोग का बार-बार आग्रह किया लेकिन सदस्यों के कान पर जूं तक नहीं रेंगते देख कार्रवाई की चेतावनी तक दी। विरोध प्रदर्शन एवं शोरगुल जारी रहा और अध्यक्ष ने सदस्यों का मूड भांप कर सदन की कार्यवाही साढ़े 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दुबारा कार्यवाही शुरू होने पर करीब पांच मिनट चले हंगामे के शांत नहीं होने पर चटर्जी ने कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी। राज्यसभा में 12 बजे कार्यवाही फिर शुरू होने पर प्रधानमंत्री ने नए मंत्रियों का परिचय कराया, सरकारी पत्र सदन के पटल पर रखे गए और सभापति ने कुछ घोषणाएं कीं। इस दौरान सभापति ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय विधेयक पेश करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्री अजरुन सिंह का नाम भी पुकारा लेकिन महंगाई के खिलाफ सदस्यों के शोरगुल में मंत्रालय में राज्य मंत्री डी पुरंदेश्वरी की आवाज खो सी गई। अंसारी के स्थान पर सदन का संचालन करने आए उप सभापति के रहमान खान ने उत्तेजित सदस्यों से कहा कि सरकार महंगाई के मुद््््दे पर अल्पकालिक चर्चा के लिए राजी हो गई है जो तत्काल शुरू हो सकती है। सदस्यों का विरोध शांत नही होने पर खान ने कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी। सरकार द्वारा महंगाई रोकने के लिए कई उपायों की घोषणा किए जाने के बावजूद मुद्रास्फीति की दर पिछले शुक्रवार को साढ़े तीन वर्ष के रिकार्ड स्तर पहुंच कर 7.41 प्रतिशत हो गई थी। वामदलों और यूएनपीए सांसदों का संसद मार्चड्ढr नई दिल्ली (वार्ता)। महंगाई के विरोध में वामपंथी पार्टियों और यूएनपीए के सांसदों ने बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन मंगलवार को यहां संसद मार्च किया और सरकार से उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्य पर अंकुश के लिए तत्काल कदम उठाने या इसके राजनीतिक नतीजे भुगतने को तैयार रहने की चेतावनी भी दी। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, फारवर्ड ब्लाक, तथा रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और यूएनपीए के प्रमुख घटक समाजवादी पार्टी तथा तेलुगू देशम पार्टी के सदस्यों ने सुबह साढ़े नौ बजे विट्ठल भाई पटेल भवन से मार्च करते हुए संसद पहुंचने के बाद मुख्य द्वार के सामने रैली एवं नारेबाजी भी की।ड्ढr ड्ढr वे अनाज एवं अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के वायदा कारोबार पर तुरंत रोक लगाने, पेट्रोल एवं डीजल के खुदरा मूल्य में हुई वृद्धि वापस लेने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के विस्तार एवं इसे मजबूत करने और जमाखोरों, कालाबाजारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधान के लिए आवश्यक उपभोक्ता वस्तु विनियमन कानून में संशोधन करने की मांग कर रहे थे। रैली के बाद राज्यसभा में माकपा के नेता सीताराम येचुरी ने महंगाई तथा मुद्रस्फीति को वैश्विक परिघटना बताने के सरकारी तर्क को खारिज कर दिया और बताया कि वामपंथी पार्टियां एवं यूएनपीए महंगाई पर अंकुश के लिए सरकार को मजबूर करने के वास्ते बुधवार से राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह मनाएंगी।उन्होंने कहा कि अगर सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने में विफल रही तो 23 अप्रैल के बाद विरोध और उग्र होगा। संसद मार्च में शामिल समाजवादी पार्टी के महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य अमर सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर वाम-यूएनपीए 1अप्रैल को एक राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित कर रही हैं।

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