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अब विज्ञानी भी गिरायेंगे बिजली !

आम इंसान तो क्या शायरों-विज्ञानियों के लिए भी बिजली कौतुक का विषय रही है, हुस्न की अदाओं से लेकर कुदरती वज्रपात तक। लेकिन, अब इस अबूझ मायावी बिजली का तिलिस्म टूट चुका है। जर्मन-फ्रांसीसी वैज्ञानिकों की एक टोली ने तूफानी बादलों को पांच टेरावॉट क्षमतावाली शक्तिशाली लेजर बीम से भेद कर फिलामेंट शक्लवाली बिजली चमकाने में सफलता हासिल कर ली है। हालांकि इस बिजली की चमक बेहद क्षणिक थी। बावजूद इसके, बादलों में विद्युत गतिशीलता देखी गयी। शोधकर्ता विज्ञानियों का कहना है कि लेजर बीम दागने का पल्स रट बढ़ाकर जरूरत के मुताबिक वास्तविक बिजली पैदा की जा सकती है। बादलों से बिजली पैदा करने का यह आइडिया 10 का है। लंबी डोरी बंधे रॉकेट दाग कर एक प्रयोग भी किया गया था। लेकिन प्रक्रिया जटिल और बेनतीजा साबित हुई थी। हाल में, लेजर से टेरावॉट ऊरा पैदा करने का प्रयोग चलन में आया। लेकिन, समस्या थी उस प्रयोग को प्रयोगशाला से बाहर लाने की। विज्ञानियों ने उसके लिए टेरामोबाइल नामक उपकरण तैयार किया। उसे तूफानी मौसम में न्यू मैक्िसको स्थित साउथ बैल्डी पर्वत चोटी पर लाकर इस हालिया प्रयोग को अंजाम दिया गया। शोध टीम में शामिल फ्रांसीसी वैज्ञानिक ऐन्ड्रे माइसीरोविज कहते हैं- अब बादलों से पैदा होने वाली बिजली का अध्ययन, और फिर, नियंत्रण संभव है। इस नियंत्रण से खास इलाके को वज्रपात मुक्त भी बनाया जा सकता है। कुछ अन्य उत्साही वैज्ञानिक इस अविष्कार में विश्व की ऊरा संकट से मुक्ति की संभावना भी देख रहे हैं। लेकिन, हर अविष्कार का नकारात्मक पहलू भी होता है। अगर, बिजली गिराने की क्षमता इंसान को मिल जाती है, तो अप्रत्याशित नहीं कि जंगे मैदान में भी इसका दुरुपयोग किया जाये।

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