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आटा मार रहा चांटा, दाल ने रुलाया

आटा मार रहा चांटा.. दाल ने रुलाया.. प्याज भी है नाराज.. सब्जियों के रंग के सामने जेब तंग है..। ये पंक्ितयां किसी हास्य कवि की नहीं, बल्कि वर्तमान जीवन की सच्चाई है। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। दाल, चावल, आटा, तेल, चीनी, आलू जैसे खाद्य पदार्थो के दाम सर चढ़ कर बोल रहे हैं। महंगाई ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। वैट के नाम पर जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ गये हैं। चुनाव में वाहनों की कमी भी महंगाई का कारण बन रही है। इतना होने के बावजदू चुनाव से महंगाई का मुद्दा गायब है।ड्ढr जनता का पेट भरे या ना भर, नेता जनता के वोट से अपना पेट भरने में जुटे हैं। परचुन दुकानदार अरुण कुमार चौधरी बताते हैं कि महंगाई के कारण ग्राहकों से रोज बकझक होती है। कई वस्तुओं के तो प्रतिदिन दाम बढ़ जाते हैं। अजीत अग्रवाल का कहना है कि आम आदमी द्वारा रोजमर्रा में उपयोग होनेवाली वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण में रहने चाहिए। सरकार को इसके लिए सार्थक कदम उठाने होंगे। गृहणी अनिता जैन कहती हैं कि महंगाई के कारण परिवार के सदस्यों के बीच खटपट होने लगी है। घर का बजट गड़बड़ होने लगा है। श्वेता के अनुसार महंगाई का प्रभाव महिलाओं पर ज्यादा पड़ता है। घर के संचालन का भार महिलाओं पर ही होता है। रोज कमाने-खानेवालों पर आफत आ गयी है। कमाई नहीं बढ़ी, दैनिक जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ने से परशानी बढ़ गयी है। ं

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