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अनिवार्य स्कैनिंग की अमेरिकी शर्त का विरोध

अमेरिका ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के मकसद से निर्यातक देशों पर निर्यात किये जाने वाले सामान की शतप्रतिशत स्कैनिंग की शर्त लादने का फैसला लिया है। 2012 से यह शर्त लागू हो जाएगी। इसके चलते भारत जसे निर्यातक देशों के लिए जहां निर्यात लागत बढ़ जाएगी, वहीं स्कैनिंग सुविधाओं पर भारी खर्च करना होगा। इस अव्यावहारिक कदम का भारत अगले साल फरवरी में होने वाली वर्ल्ड कस्टम आर्गेनाइजेशन की क्रांफ्रेंस में विरोध करगा। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) के चेयरमैन पी. सी. झा ने वर्ल्ड कस्टम आर्गेनाइजेशन के एशिया प्रशांत क्षेत्र के तीन दिन के सम्मेलन के समापन पर संवाददाताओं को यह जानकारी दी। इस मौके पर सीबीईसी के एक अधिकारी ने बताया कि अभी भारत में नोवा शेवा बंदरगाह पर दो स्कैनर हैं। जो कंटेनर को स्कैन कर सकते हैं। इस तरह के सात स्कैनर और खरीदे जा रहे हैं, जो मुंबई, कांडला, चेन्नई और तूतीकोरिन बंदरगाह पर लगाए जाएंगे। एक स्कैनर की कीमत 150 करोड़ रुपये है। देश के सभी बंदरगाहों पर यदि स्कैनर लगाने पड़े तो यह एक बड़ा वित्तीय बोझ बन जाएगा। इससे निर्यातकों की भी दिक्कतें बढ़ जाएंगी। उक्त सम्मेलन में आए 28 देशों के प्रतिनिधियों ने अमेरिका के इस कदम का विरोध किया है। पी. सी. झा ने संवाददाताओं को विगत साल अप्रत्यक्ष कर संग्रह के बार में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बजट में जो अनुमान लगाया गया था, कर संग्रह उससे अधिक है। सीमा शुल्क की वसूली लक्ष्य से अधिक रही, लेकिन उत्पाद शुल्क लक्ष्य से कुछ कम रहा। सेवा कर भी संशोधित अनुमान को पार कर गया है।ड्ढr

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