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मशीन खराब हुई तो लाखों बचे

आम तौर पर किसी भी विभाग की मशीनें खराब होने पर खर्चे बढ़ जाते हैं और काम भी बाधित होने लगता है। लेकिन पशुधन विभाग में मशीनें क्या खराब हुईं विभाग के लाखों रुपए बचने लगे। विभाग के अधिकारी अब बंद पड़ी मशीनों को बेचने की तैयारी कर रहे हैं। पशुओं के क्रत्रिम गर्भाधान के लिए पशुधन विभाग के आधा दर्जन फार्म हाउस हैं। गर्भाधान की आवश्यक सामग्री एवं दवाएँ रखने के लिए लिक्िवड नाइट्रोजन की काफी जरूरत पड़ती रहती है। विभाग ने नाइट्रोजन के लिए अलग-अलग समय में कई मशीनें खरीदीं। 1में सल्जर कम्पनी से 1लाख रुपए की मशीनें विभाग ने अपने विभिन्न फार्म हाउसों में लगवाईं। इन पर कर्मचारी भी तैनात कर दिए गए। लेकिन कुछ ही समय बाद ये मशीनें खराब होने लगीं। अधिकारी तर्क देते हैं कि इनकी वार्षिक सर्विसिंग का कान्ट्रेक्ट नहीं किया गया था, जिसके कारण ये मशीनें खराब हो गईं। पशुधन विभाग को प्रदेश भर में करीब 80 लाख रुपए का नाइट्रोजन उपयोग करना पड़ता है। मशीनों की खराबी के कारण उत्पादन बंद हो गया और पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान के शोध में लगे चिकित्सकों को बाजार से नाइट्रोजन उपलब्ध कराया जाने लगा। जब विभाग ने लिक्िवड नाइट्रोजन की खरीद बाजार से की तो पता चला कि विभाग अपने यहाँ लिक्िवड नाइट्रोजन बनाने की मशीनें लगाकर बेवजह लाखों रुपए खर्च कर रहा था, क्योंकि बाजार में यह सस्ता मिलता था। तब पशुधन विभाग ने मशीनों को ठीक कराने की योजना ही ठंडे बस्ते में डाल दी और नाइट्रोजन की सीधी खरीद करनी शुरू कर दी।ड्ढr सूत्रों का कहना है कि विभाग की आधा दर्जन मशीनों में से सिर्फ एक गजरिया फार्म हाउस में चलाई जा रही है। बाकी को बेचने की तैयारी है।

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