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निजीकरण के विरोध में गोलबंद हो रहे माप तौल विभाग के कर्मी

माप- तौल विभाग के निजीकरण से संबंधित केन्द्र के प्रस्ताव के खिलाफ अधिकारी और कर्मचारी गोलबंद होने लगे हैं। इसके लिए राज्य के कर्मचारी देश भर में घूमकर रणनीति बना रहे हैं और कर्मचारियों - अधिकारियों को एकाुट कर प्रस्ताव के विरोध में जनमत तैयार कर रहे हैं। अखिल भारतीय माप विज्ञान फेडरशन के अध्यक्ष आरपी चौधरी ने बताया कि दो दिन पूर्व हैदराबद में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें सभी राज्यों से संघ के पदधारक जुटे थे। वहां इस बात पर चर्चा हुई कि यह विभाग उपभोक्ताओं के संरक्षण के लिए बना था।ड्ढr ड्ढr राज्स्व वसूली इसका मुख्य लक्ष्य कभी नहीं रहा। ऐसे में विभाग के कार्यों को निजी हाथ में सौंपने पर न सिर्फ कर्मचारियों का अहित होगा बल्कि यह उपभोक्ताओं के हित में भी नहीं होगा। प्रस्ताव की समीक्षा के लिए बनी संसदीय समिति ने भी इस बात को स्वीकार किया है और प्रस्ताव को असंगत बताया है। लेकिन केन्द्र सरकार ने संसदीय समिति की रिपोर्ट के बाद नई ‘चाल’ चल दी है। सरकार ने प्रस्ताव का नाम बदल दिया लेकिन उसमें तथ्य सार वही हैं जो पूर्व के प्रस्ताव में थे। संगठन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी कभी भी इसे स्वीकार नहीं कर सकते। श्री चौधरी ने बताया कि वर्ष 2005 में पहली बार केन्द्र ने इस प्रस्ताव को संसद में पेश किया था। विचारोपरांत प्रस्ताव को देवेन्द्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में बनी संसदीय समिति को सौंप दिया गया। उक्त समिति ने तब कहा था कि इस प्रस्ताव के पारित होने पर देश भर में उपभेक्ता ठगी के शिकार होंगे।

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