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नौ साल में नहीं बने कैदियों के लिए 13 बैरक

राज्य के चाईबासा, दुमका, गुमला, सरायकेला एवं सिमडेगा जिले में कैदियों के लिए 13 बैरकों का निर्माण करना था, जो नौ साल में भी पूर नहीं हुए। गृह विभाग ने 1003 में बैरक के निर्माण के लिए भवन निर्माण विभाग को 3.05 करोड़ रुपये दिये। जून 2007 तक एक भी बैरक नहीं बना था।ड्ढr सरायकेला में दो बैरक बनाने थे। एक का कार्य प्लींथ तक हुआ था, तो दूसरा विद्युतीकरण के अभाव में बेकार पड़ा था। दोनों बैरकों के निर्माण पर 55.54 लाख के एस्टिमेट में से 40.00 लाख खर्च हो चुके थे। चाईबासा में राशि नहीं मिलने के कारण काम अधूरा पड़ा था। यह योजना 2रोड़ की थी। दुमका में दो बैरक बनाये गये, लेकिन ये चाहरदीवारी के अभाव में 14 महीने तक बेकार पड़े रहे। इसके लिए अलग से एस्टिमेट तैयार किया गया। गोड्डा में 30.12 लाख की लागत से दो बैरक का निर्माण कराना था। इस पर 3रोड़ रुपये खर्च कर दिये गये। 1.85 करोड़ रुपये बचे रहने के बाद भी बैरकों के कार्य पूरे नहीं किये गये।ड्ढr इसी प्रकार गुमला में दो बैरकों के निर्माण के लिए 80.00 लाख रुपये आवंटित किये गये थे। 65.31 लाख रुपये खर्च किये गये। 14.6लाख रुपये शेष रहने के बाद भी इनके काम पूर नहीं हुए थे। एगीक्यूटिव इांीनियर ने एजी को बताया कि राशि के अभाव में काम अधूरा पड़ा है। लगभग यही स्थिति सिमडेगा जिले में निर्माणाधीन बैरक की थी।

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