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बजट सत्र पहले समेटने की तैयारी

महंगाई पर चर्चा के दौरान सांसद बड़ी संख्या में संसद से गायब रहे। अब बजट सत्र के बचे कार्यकाल के ही पर कतरने की तैयारी तल रही है। सूत्रों का दावा है कि कर्नाटक विस व बंगाल में पंचायत चुनावों की सरगर्मी के नाम पर सरकार भाजपा व वाम दलों को राजी करने की जुगत में लगी है। पक्के संकेत हैं कि वित्त विधेयक पर अगले सप्ताह संसद की मंजूरी मिलते ही सरकार संसद चलाने के फंदे से कन्नी काटेगी। संसद का मौजूदा सत्र मई तक चलना था, लेकिन पूरी कोशिश है कि इसे 30 अप्रैल तक समेट दिया जाए। सरकार कह रही है कि वित्त विधेयक के बाद काम ही क्या बचा है। भाजपा के वरिष्ठ सांसद संतोष गंगवार भी कहते हैं कि सरकार के पास कोई एजेंडा है, तो वह बताए कि मई तक सत्र चलाने के लिए उसके पास क्या विधाई काम है?ड्ढr संसद सत्र को तय वक्त से पहले खत्म करने की मंशा पर अब तक सिर्फ भाकपा ने ऐतराज उठाया है। लोकसभा में पार्टी नेता गुरुदास दासगुप्ता ने हिंदुस्तान से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्हें भी इस आशय के संके त मिले हैं कि संसद सत्र को तय समय से पहले ही समेटने की तैयारी हो रही है। लेकिन हम सरकार के इस तर्क से सहमत नहीं कि उसके पास कोई कामकाज नहीं बचा। देश में करीब 35 करोड़ से अधिक असंगिठत क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा संबंधी विधेयक को संसद के इसी सत्र में क्यों नहीं पेश किया जा सकता? वाम दलों ने सरकार को महिला आरक्षण पर प्रधानमंत्री का वह वायदा भी याद दिलाया है कि इसे इसी सत्र में क्यों पेश नहीं किया जाएगा। एक मई से चार मई तक संसद में अवकाश होगा। इसलिए अगले माह 5 मई को ही संसद की बैठक हो सकती है। यह सरकार पर है कि वह 30 अप्रैल को ही संसद की छुट्टी कर देगी या 5 मई तक कार्यवाही खींचेगी।

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