बासुकीनाथ मंदिर में चंद्रकूप के पानी से आ रही दुर्गंध - बासुकीनाथ मंदिर में चंद्रकूप के पानी से आ रही दुर्गंध DA Image

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बासुकीनाथ मंदिर में चंद्रकूप के पानी से आ रही दुर्गंध

बासुकीनाथ मंदिर के पवित्र चंद्रकूप के पानी से दुर्गंध आ रही है। मंदिर प्रबंधन के कई बार सफाई करवाने के बावजूद चंद्रकूप के पानी में पपड़ी पड़ जा रही है। यह स्थिति महीनों से है। अब मंदिर प्रबंधन ने इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए विशेषज्ञों से जांच कराने का फैसला लिया है। जरमुंडी के बीडीओ सह बासुकीनाथ मंदिर के प्रभारी संजय कुमार दास ने बताया कि मंदिर न्यास समिति ने भी विशेषज्ञों से इसकी जांच कराने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि चंद्रकूप के स्रोत में कहीं से गंदा पानी आ रहा है।

क्या है चंद्रकूप का धार्मिक महत्व
भक्तों के बीच चंद्रकूप के जल बाबा बासुकीनाथ को अर्पित करने का काफी महत्व है। ऐसी मान्यता है कि चंद्रकूप का जल बाबा को चढ़ाने से सभी पवित्र नदियों के जल चढ़ाने का फल मिल जाता है। यही वजह है कि न केवल बासुकीनाथ मंदिर बल्कि स्थानीय लोग अपने घर में भी होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में चंद्रकूप के पानी का इस्तेमाल करते रहे हैं। चंद्रकूप का निर्माण मंदिर परिसर में ईशान कोण में है जो यह दर्शाता है कि वास्तु को ध्यान में रख कर यह कूप बनाया गया है। पहले यह कूप कच्चा था बाद में हंडवा स्टेट के वारिसों ने इस कूप का पक्कीकरण करवा दिया था। 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
पानी में अधिक मात्रा में आयरन होने से पानी के ऊपरी सतह पर पपड़ी जम जाता है। इसे आयरन लेयर कहते हैं। पानी की जांच के लिए राज्य मुख्यालय में लैब है। बीआईटी मेसरा के लैब में भी इसकी जांच हो सकती है। अगर पानी का स्रोत गंदा हो गया होगा तो उसके लिए आयरन रिमुवर प्लांट लगाना होगा पर यह प्लांट बाहर ही लगाया जा सकता है।
- मंगल पूर्ति, कार्यपालक अभियंता, पेयजल स्वच्छता विभाग
                       

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