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सुशील मोदी दिल्ली तलब

भाजपा की प्रदेश इकाई में विद्रोह की भड़कती आग के बीच उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के शुक्रवार को नई दिल्ली रवाना होते ही राजधानी पटना में अटकलों का बाजार गर्म हो गया। मंत्रिमंडल पुनर्गठन के बाद से श्री मोदी अपनी पार्टी के नाराज विधायकों और मंत्रियों के निशाने पर रहे हैं। इस बीच प्रदेश भाजपा में असंतोष की आग और तेज हो गई है।ड्ढr ड्ढr ढाका विधायक अवनीश कुमार सिंह के निवास समेत दो-तीन जगहों पर हुई लगभग डेढ़ दर्जन असंतुष्ट विधायकों की बैठक के बाद श्री सिंह ने कहा कि श्री मोदी को फौरन हटाने का आलाकमान को अल्टीमेटम दे दिया गया है। यदि 25 अप्रैल तक उनको विधायक दल के नेता के पद से नहीं हटाया जाता है तो हम सब मुंह पर पट्टी बांध कर पटना की सड़कों पर प्रदर्शन करंगे। श्री सिंह ने कहा कि बैठक में श्री मोदी को हटाने के लिए जहां एक दर्जन विधायकों की कोर कमेटी बनाई गई है, वहीं उन्होंने ‘मोदी हटाओ, बिहार बचाओ’ का नारा भी दिया।ड्ढr ड्ढr बैठक के बाद पार्टी के वरीय विधायक सत्यदेव नारायण आर्य ने उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर करारा प्रहार किया। विधानसभा में पार्टी के उप नेता श्री आर्य ने अपने विधायक दल के नेता श्री मोदी को ही बदलने की मांग कर दी। श्री आर्य ने आरोप लगाया कि श्री मोदी स्वार्थ में अंधे हो गए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में सामूहिक निर्णय का उनका दावा खोखला है और ऐसा कहकर वह लोगों की आंख में धूल झोंक रहे हैं। श्री आर्य ने कहा कि श्री मोदी द्वारा सामाजिक समीकरणों का ध्यान रखे जाने की बात कोरा झूठ के सिवा कुछ नहीं हैं। वह रविदास समाज से आते हैं और इस दलित वर्ग की प्रदेश नेतृत्व ने हमेशा उपेक्षा की है। उन्हें नहीं पता श्री मोदी क्यों उनसे बैर पाले रहते हैं। वह हमेशा से उनके तानाशाही रवैए के शिकार हुए हैं। उनका कहना है कि जिस तरह बिहार में भाजपा सिद्धांतों को तिलांजलि देकर दलितों की उपेक्षा कर रही है उसके मद्देनजर लोकसभा चुनाव में उसे इस वर्ग के वोट का नुकसान उठाना तय है और इसका असर पार्टी द्वारा लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने की कोशिशों पर भी पड़ेगा।ड्ढr ड्ढr विधान पार्षद बालेश्वर सिंह भारती ने कहा है कि श्री मोदी और प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह के नेतृत्व में यदि भाजपा लोकसभा चुनाव में उतरी तो उसे उसकी औकात का पता चल जाएगा। उन्होंने कहा है कि ‘एक व्यक्ित’ की मनमानी ने बिहार भाजपा में ज्वालामुखी जैसा विस्फोट किया है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी के मद्देनजर उन्होंने आलाकमान से मौजूदा नेतृत्व के कार्यकलाप की पड़ताल कराने की मांग की है। दूसरी तरफ असंतुष्ट नेताओं ने अपनी मुहिम को व्यापक आकार देना शुरू कर दिया है। इसके तहत पहले से नाराज चल रहे नेताओं को भी वे अपने ‘नेतृत्व बदलो’ अभियान से जोड़ रहे हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री चन्द्रमोहन राय ने कहा कि अब मामला किसी को मंत्रिपरिषद से हटाने या विभाग बदलने तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर टिक गया है। मुख्य विरोध अब पार्टी को निजी जागीर की तरह चलाने वाले नेताओं के खिलाफ है और इस बार फैसला होकर रहेगा। श्री राय ने कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब श्री मोदी और प्रदेश अध्यक्ष ने विधायकों और पार्टी के अन्य बड़े नेताओं की भावनाओं को आहत किया है बल्कि पहले भी कई दफा इन दोनों ने आम सहमति की परवाह न करके मनमानी की है। असंतुष्ट जमात द्वारा यह प्रचारित किए जाने पर कि अधिसंख्य विधायक उनके साथ हैं, श्री राय ने दावा किया कि 80 फीसदी विधायक और मंत्री उनसे मिलकर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। गुरुवार को उनके निवास पर विधायकों की हुई बैठक की बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह महज संयोग था कि एक के बाद एक कुछ विधायक उनके यहां पहुंच गए।ड्ढr ड्ढr दोपहर बाद विमान से श्री मोदी के दिल्ली रवाना होने की खबर मिलते ही प्रदेश की राजनीति खासकर भाजपा में सरगर्मी तेज हो गई है। समझा जाता है कि आलाकमान ने श्री मोदी को बिहार में असंतुष्ट गतिविधियों पर विमर्श के लिए दिल्ली तलब किया है जहां वे केन्द्रीय नेतृत्व के सामने बिहार के घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखेंगे। भाजपा के सर्किल में एक चर्चा यह भी है कि श्री मोदी बगावत पर उतारू विधायकों के भारी आक्रोश के मद्देनजर सफाई देने खुद ही केन्द्रीय नेताओं के पास पहुंच गए हैं। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह द्वारा मंत्रियों-विधायकों को समझाने-बुझाने का कोई असर नहीं पड़ता देख उनके द्वारा यह पहलकदमी की गई है। बताया जाता है कि इसका आधार बनाने गुरुवार की रात को ही एक विधान पार्षद और नीतीश सरकार में नए शामिल हुए एक मंत्री दिल्ली रवाना हो गए थे। गत 13 अप्रैल को मंत्रिमंडल पुनर्गठन के बाद से भाजपा में असंतोष के नित नए-नए स्वर फूट रहे हैं। वैसे श्री मोदी के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह अपनी पीठ दर्द का इलाज कराने दिल्ली गए हैं। नई दिल्ली से फोन पर भाजपा के प्रदेश प्रभारी कलराज मिश्र ने उम्मीद जताई कि बिहार भाजपा का ‘मामला’ शीघ्र ही शांत हो जाएगा। यह पूछे जाने पर कि प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ लगातार आग उगल रहे नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या उनको कोई नोटिस भेजी जाएगी, श्री मिश्र ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई बात नहीं है। अब रुठों को मनाने की कवायदड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के बाद हटाए गए मंत्रियों की नाराजगी दूर करने और उन्हें मनाने की कवायद शुरू हो गयी है। हालांकि निवर्तमान मंत्री डॉ. मोनाजिर हसन के पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष से इस्तीफा देने के बाद कई तरह की अटकलों को फिलहाल विराम लग गया है। यही नहीं अन्य उपाध्यक्षों द्वारा इस्तीफा दिए जाने के कयास भी शीघ्र साकार होने की संभावना क्षीण पड़ गयी है। इस बीच पूर्व लघु सिंचाई मंत्री विश्वमोहन कुमार अपनी फरियाद लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव से दिल्ली में मुलाकात कर अपनी बातें रखीं। पिछले दिनों उन्होंने साजिश के तहत मंत्री पद से हटाए जाने का आरोप लगाया था।ड्ढr ड्ढr खबर है कि गुरुवार को श्री हसन के इस्तीफा देने के बाद दो उपाध्यक्षों ने अपना इस्तीफा तैयार किया। दोनों पूर्व राज्यमंत्री हैं। तय हुआ था कि और उपाध्यक्षों का इस्तीफा जमा होने के बाद इन्हें इकट्ठे प्रदेश नेतृत्व को दे दिया जाएगा। मगर मान-मनौव्वल के बाद यह मुहिम टल गई। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद मोनाजिर हसन को फोन कर उनसे बातें कीं। मुख्यमंत्री ने उनसे नाराजगी का सबब भी जानना चाहा। मोनाजिर हसन ने उन्हें अपनी जमात के लिए काम करने की बात बताई और कहा कि इसके लिए वे अभियान भी चलाएंगे। इसीलिए पार्टी उपाध्यक्ष के महत्वपूर्ण दायित्व को संभालने में वह सक्षम नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि उनके अभियान से पार्टी को ही मजबूती मिलेगी। उन्होंने खुद को ‘बागी’ कहे जाने से भी इंकार किया। उधर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पूर्व सूचना व जनसंपर्क मंत्री अजरुन राय से बात की और उनसे पार्टी संगठन के लिए काम करने की अपील की। इस बीच पार्टी के कुछ विधायकों ने नवनियुक्त पार्टी उपाध्यक्षों से मुलाकात भी की। मोनाजिर को हटाने के विरोध में प्रदर्शनड्ढr मुंगेर (सं.सू.)। डा. मोनाजिर हसन को मंत्री पद से हटाने के विरोध में शुक्रवार को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ मुंगेर की ओर से हमीद चौक पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला जलाया गया तथा जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी ‘नीतीश सरकार मुर्दाबाद, अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय बंद करो’ जसे नार लिखी तख्तियां लेकर चल रहे थे। जुलूस हमीद चौक से निकला और जामा मसिद होते हुए राजीव गांधी चौक, दीनदयाल चौक से गुजरने के बाद पुन: हमीद चौक पहुंचा। जुलूस में शामिल हारुण रशीद, वजी अहमद आजाद, मो. जहांगीर सहित अन्य नेताओं ने कहा कि डा. हसन को मंत्री पद से हटाकर नीतीश कुमार ने मुंगेर के लोगों का अपमान किया है। डा. हसन ने मंत्री पद पर रहकर मंत्रिमंडल की गरिमा को बनाए रखा तथा उन्होंने राज्य की जनता के हित में काम किया, लेकिन उन्हें मंत्री पद से हटाकर सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के साथ अन्याय कर रही है। प्रदर्शनकारी नीतीश सरकार से डा. हसन को सम्मानपूर्वक पुन: मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग कर रहे थे। इस अवसर पर मो. आलम,राजेश प्रधान, मो. शमीद, समी आलम, मो. एजाज, मो. सोनू, मै. नैयर, शौकत अली, अरशद अली, अशरफ अली, मो. खुर्शीद, मो. सुहैल आदि शामिल थे।

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