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अनुभव

हर किसी को अनुभवी लोग चाहिए। शायद यही सोचकर पहिया वाले विभाग के तत्कालीन छोटे मंत्रीजी के आप्त सचिव नए वाले विभागीय मंत्रीजी के पास जा रहे थे। तैयारी पूरी करके गए थे। लिखा-पढ़ी में ले गए थे कि महीने में कम से कम कितनी कमाई होगी। इससे अधिक कमाई कैसे होगी। कमाई के किस स्तर के बाद खतर का निशान शुरु होता है। उम्मीद थी कि पूरा ब्योरा देखने के बाद नए मंत्रीजी बगल में बिठा कर चाय-पानी कराएंगे। फिर प्यार से पूछेंगे कि मिश्राजी कब ज्वाइन कीािएगा। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मंत्रीजी के पास जसे ही मिश्राजी के नाम का पुर्जा गया, वे भड़क गए-खबरदार जो यह आदमी मेर घर का भी रुख कर। भगाइए। मिश्राजी अब किसी दूसरे मंत्री की तलाश में हैं।ड्ढr यादगारड्ढr दुश्मन भी जानते हैं कि आशिकी में उनकी मंत्रिगिरी गई। चोरी का आरोप नहीं था। बुढ़ौती का प्यार होता भी है जानलेवा। पद से हटे तो सचिवालय स्थित कमर से अपना निजी सामान उठा ले गए। मांझीजी ने पदभार ग्रहण किया तो पाया कि कमरा साफ-सुथरा है। पुरानेवाले मंत्रीजी सिर्फ एक तस्वीर छोड़ गए हैं। तस्वीर में वह एक महिला केंद्रीय मंत्री के साथ खड़े हैं। तस्वीर बहुत अच्छी है। उम्र के आखिरी पड़ाव में भी पूर्व मंत्रीजी के चेहर पर चमक है। मानों जिन्दगी की सभी मुरादें पूरी हो गईं। पता चला कि विवाद के चलते पूर्व मंत्रीजी इस तस्वीर को अपने घर नहीं ले गए। खर, मांझीजी ने पूर्व मंत्रीजी की भावना का सम्मान किया। आदेश दिया कि इस तस्वीर को नहीं हटाया जाए।ड्ढr मुहूर्तड्ढr दल बदलने का रिकार्ड बनाने के बाद भाई को बड़ी मुश्किल से मंत्री पद मिला है। सो, एक-एक कदम नाप तौल कर उठाते हैं। शपथ ग्रहण के अगले दिन बंदी के कारण पदभार नहीं ले पाए थे। कई पंडितों की राय ली गई। एक मुहूरत पर सभी पंडित राजी हुए। घर से सचिवालय की ओर काफिला चला। सबके सब जल्दबाजी में थे। कार्यालय के मुख्य द्वार से प्रवेश करने ही जा रहे थे कि एक बंदा घड़ी देख कर चीख पड़ा-ठहरिए। सबके सब फ्रीा हो गए। पांच मिनट बाद उसी बंदे ने खामोशी तोड़ी-अब बढ़िए। सब आगे बढ़े। बंदे ने ठहरने का राज खोला-गजब हो जाता। पांच मिनट पहले हम लोग पहुंच गए थे।ड्ढr मंजरड्ढr मंत्री पद गंवाने के बाद का मंजर उनके सामने था। रो सुबह दुआ-सलाम करनेवाले लोग भी किनारे खड़े हो गए थे। मगर दो दिन बाद ही उनके घर कई लोग जुटे। अल्पसंख्यकों का हवाला दिया। गुणों की चर्चा इस कदर की कि उन्हें लगा कि भाई लोग कहीं दूसर की तारीफ तो नहीं कर रहे हैं। लोगों ने भरोसा दिलाया कि तारीफ उन्हीं की हो रही है। खुश हुए। अगला प्रस्ताव था कि यह बगावत पर उतरने का सही अवसर है। पूर्व मंत्रीजी सावधान हो गए। आंखें मूंदकर बोले-ऐसा है कि सराी ने मंत्री बनाया था। लगता है कि मुझ में ही कोई कमी रह गई होगी। हम खुद में सुधार करंगे। आप लोग मेहरबानी कीािए। यहां से तशरीफ ले जाइए। आदाब।ड्ढr गोलाड्ढr दो साल पहले राजद सुप्रीमो में डा. लोहिया की छवि देखनेवाले नेताजी अब पूरी तरह बदल गए हैं। उन्होंने मान लिया कि सत्ता गोला-बारूद से नहीं मिलती है। इसे हासिल करने के लिए मीठी जुबान चाहिए। ठंडे घर में बैठने के दिन संतों की मुद्रा में आ गए। आत्मा-परमात्मा की बात करने लगे। लगे हाथ आत्मचिन्तन भी कर बैठे-मेर चलते राजा को तकलीफ उठानी पड़ रही है। कुछ करना चाहिए। यह विचार मन में आते ही पत्रकारों को न्योता दिया-आइए। कुछ गोला छोड़ने का इरादा है। पत्रकार पहुंचे तो बताया गया कि मंत्रीजी की तबीयत खराब है। बदले में अफसरों ने पत्रकारों से बातचीत की। अफसरों ने आंकड़ों के जरिए यही साबित करने की कोशिश की कि पहले के विभागीय मंत्री परले दज्रे के आलसी थे। उनकी आलस के चलते विभाग का काम ठीक से नहीं हो रहा था।

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  • Web Title: राज दरबार