अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

एक कट्ठे में एक क्िवंटल का रिकार्ड

दोहट नारायण गांव के किसान विमल प्रसाद सिंह ने अपनी सूझबूझ से मिट्टी से सोना उगाने के सपने को साकार कर दिखाया है। उन्होंने खुद की तैयार की हुई बीज से एक कट्ठे में एक क्िवंटल से अधिक गेहूं की उपज की है। इस उपज में कटनी में दिए गए मजदूरों को गेहूं के बोझा को जोड़ दिया जाय तो यह उपज तीन मन प्रति कट्ठा से अधिक पहुंच जाता है।ड्ढr स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त युवा किसान श्री सिंह आत्मा, मधुबनी से खेती-बारी को लेकर एक सप्ताह का प्रशिक्षण ले चुके हैं। वह भी औषधीय पौधा एवं वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की। पर, उन्होंने इससे इतर गेहूं की उपज बढ़ाने पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया। उन्होंने राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा से 343 किस्म की गेहूं बीज लेकर एक एकड़ में तथा एनएससी की 711 किस्म की बीज दस कट्ठे में बुआई की।ड्ढr ड्ढr उन्होंने दोनों खेतों से आरी के किनार के पौधे को छांटकर फिर अगले साल उसकी बीज के रूप में बुआई की। तीन साल की मेहनत के बाद अपने से तैयार की हुई बीज की इस साल उन्होंने जो खेती की, वह काफी फायदेमंद रही। गेहूं की बाली में अमूमन 42 से 52 दाना होता है पर उनके खेत में उपजी इस गेहूं की बाली में 72 से 82 दाना हुआ। उन्होंने इस गेहूं का नाम ‘लक्ष्मी’ रखा है, जो खलिहान से ही 16 रुपये प्रति किलो की दर से बीज के रूप में बिक गया।ड्ढr उन्होंने फसल उगाने के लिए खेत की जुताई जीरो ट्रिलेज से की। एक एकड़ प्लॉट में 125 किलो वर्मी कम्पोस्ट, 60 किलो डीएपी तथा 20 किलो पोटाश डालकर गेहूं की बुआई की। फसल की कटनी तक तीन सिंचाई एवं 25 किलो की दर से दो बार ‘सल्फेट’ का छिड़काव किया। इसके बाद 130 से 135 दिनों में फसल पक कर तैयार हो गया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: एक कट्ठे में एक क्िवंटल का रिकार्ड