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विद्रोह के अखाड़े में दो और ने ठोंकी ताल

भाजपा में प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ भड़की असंतोष की आग को हवा देने शनिवार को दो और नेता ‘अखाड़े’ में कूदे। पार्टी के कद्दावर नेता माने जाने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह ने शनिवार को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह को चेताया कि अपने विरोध की आवाज को दबाने के लिए वे विधायकों को अगले मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री बनाने और लोकसभा टिकट का प्रलोभन देने और डराना-धमकाना बंद करं वरना इसका अंजाम बुरा होगा। दूसरी ओर भाजपा विधायक जनार्दन सिंह सीग्रीवाल नीतीश मंत्रिमंडल से हटने के बाद पहली बार जलालपुर पहुंचे।ड्ढr ड्ढr इसी दौरान ही मुख्यमंत्री ने दूरभाष पर श्री सीग्रीवाल से मीड़िया में उड़ रही खबरों के संबंध में बातचीत की तथा पटना आकर अविलंब मिलने और विकास यात्रा में साथ देने का आग्रह किया।ड्ढr श्री सिंह ने कहा कि आज पार्टी जिस मोड़ पर खड़ी है उसके लिए श्री मोदी जिम्मेदार हैं और उनको इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए खुद ही विधायक दल के नेता का पद छोड़ देना चाहिए। नेतृत्व पर हमला बोलने में आज उनका साथ भाजपा विधायक रामप्रीत पासवान ने भी दिया। विधान पार्षद बालेश्वर सिंह भारती से मुलाकात के बाद श्री पासवान ने दलितों की उपेक्षा का मुद्दा उछालकर मोदी और प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह की जोड़ी को हटाने की मांग कर दी। एक ओर श्री मोदी जहां दिल्ली में हैं वहीं दूसरी तरफ शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद के पटना आने से यहां राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। विधायकों द्वारा खोले गए मोर्चे की बाबत पूछे जाने पर श्री प्रसाद ने बताया कि वह तो मामला ‘संभालने’ आए हैं। ऐसे में उनका कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। अलबत्ता उनका कहना था कि वह रविवार को नए पीएचईडी मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे की शादी में जरूर शामिल होंगे। श्री प्रसाद ने ताजा घटनाक्रम पर श्री चौबे समेत यहां के कई भाजपा नेताओं से बात की।ड्ढr गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि उनको सूचना मिली है कि बिहार से जुड़े कुछ केंद्रीय नेता भी पटना आकर नाराज विधायकों को अंजाम भुगतने की चेतावनी देकर उनको भयभीत कर रहे हैं। मगर इन सब तिकड़मों से लगता नहीं कि विधायकों का मूड बदलने वाला है। उलटे इससे प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं का चेहरा और बेनकाब हो गया है। श्री सिंह ने कहा कि जब प्रदेश के प्रमुख नेताओं का ही इस तरह विरोध होगा तो पार्टी कैसे चलेगी। इस मामले में केन्द्रीय नेताओं को खुद यहां के विधायकों को बात करने के लिए दिल्ली बुलाना चाहिए। श्री पासवान ने मोदी पर तानाशाहीपूर्ण रवैया अख्तियार करने का आरोप लगाया और कहा कि मंत्रिमंडल पुनर्गठन पर पार्टी की कोर कमेटी की अनदेखी करके उन्होंने ठीक नहीं किया। उन्होंने कहा कि मोदी के इन्हीं अलोकतांत्रिक निर्णयों से आज पार्टी की स्थिति डावांडोल है। जिन लोगों ने पार्टी को खून-पसीने से सींचा उनके लिए संगठन में कोई जगह नहीं है। वहीं श्री भारती ने दावा किया कि उनके साथ जुड़ने वाले विधायकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। उनको पूरा यकीन है कि केद्रीय नेतृत्व ‘वनमैनशो’ के खिलाफ कदम उठाएगा। दिल्ली से मिल रहे संकेतों के मुताबिक हफ्ते भर के भीतर आलाकमान द्वारा उन सभी को बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा।ड्ढr ड्ढr अश्विनी कुमार चौबे भी शनिवार को भागलपुर से पटना पहुंचे। उनकी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात तय मानी जा रही है। बताया जाता है कि वह अपने नए विभाग की जिम्मेदारी संभालने पर राजी हो गए हैं। उनके समर्थकों का दबाव था कि विरोध तो विभाग का कार्यभार संभालने के बाद भी जारी रखा जा सकता है। लेकिन मौजूदा माहौल में विभाग नहीं जाने का सीधा अर्थ निकाला जाएगा कि श्री चौबे महज महत्वपूर्ण विभाग नहीं मिलने से नाराज हैं। उधर मोदी के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह अपनी पीठ के दर्द का इलाज कराने दिल्ली स्थित एम्स में गए और डाक्टरों से मिले।ड्ढr शनिवार को जलालपुर पहुंचने के बाद श्री सीग्रीवाल कार्यकर्ताओं, शुभचिंतकों तथा ग्रामीणों से मिल रहे थे। चेहर पर मुस्कान लिए श्री सीग्रीवाल जिला भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के जिज्ञासा भरे राजनीतिक सवालों के जवाब दे रहे थे। पत्रकारों से उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से उन्हें कोई गिला-शिकवा नहीं है। बस आपत्ति है तो हटाए जाने के तौर-तरीकों पर। मंत्री पद मेरा साध्य नहीं है। अगर रहता तो वर्ष 2000 में ही मंत्री बन जाता। उन्होंने कहा कि जलालपुर की जनता का प्रम व स्नेह मेर साथ है तथा मैं इनकी सेवा अनवरत करता रहूंगा। पुतला दहन के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह तो जनता के साथ-साथ कार्यकर्ताओं का भावनात्मक आंदोलन है जिसे कोई नहीं रोक सकता। लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

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