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भ्रष्टाचार मामलों के लिए विशेष अदालतें हों

सरकार और न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतों के गठन की तत्काल जरूरत है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के दो दिवसीय संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यह सुझाव उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन ने दिया है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी इस बात से सहमत हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालत के गठन की तत्काल जरूरत है। इस अवसर पर न्यायमूर्ति बालाकृष्णन के अतिरिक्त केन्द्रीय विधि और न्याय मंत्री हसंराज भारद्वाज, विधि राज्यमंत्री के वेंकटपति तथा न्याय विभाग के सचिव मधुकर गुप्ता भी मौजूद थे।ड्ढr ड्ढr भारत में अदालतों में न्याय मिलने में होने वाली देरी से न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। सम्मेलन की बैठक के एजेंडे की सूची में भी आगाह किया गया है। न्याय मिलने में विलंब की समस्या से यदि समय रहते नहीं निपटा गया तो लंबित मामलों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि समूची न्याय प्रणाली इस बोझ के कारण ध्वस्त हो जाएगी। इस समय भारतीय अदालतों में तीन करोड़ मामले लम्बित पड़े हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि न्याय मिलने में हो रही देरी के अलावा भ्रष्टाचार भी सरकार और न्यायपालिका दोनों में बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें लिखित सुझाव दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतों का तत्काल गठन करने की जरूरत है और वह इस सुझाव से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि इससे न्यायिक प्रणाली के प्रति विश्वास की भावना बढ़ेगी। मुख्य न्यायाधीशों द्वारा शुक्रवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत विशेष न्यायाधीशों की नियुक्ित हो जो मुख्य रूप से भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों को जहां तक संभव हो दिन-प्रतिदिन आधार पर निपटाया जाएं।

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  • Web Title: भ्रष्टाचार मामलों के लिए विशेष अदालतें हों