अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्कूलों में जातिशास्त्र पढ़ाया जाए!

पिछड़े वर्गो को उच्च शिक्षण संस्थानों में 27 फीसदी आरक्षण देने वाले अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ की यह स्वीकारोक्ित कि ‘हिन्दू समाज मूलत: जाति पर आधारित समाज है और इसे स्वीकार करना ही होगा।’ यह टिप्पणी आजादी के बाद के साठ वर्षो में जाति, सम्प्रदाय विहीन समाज बनाने की हमारी शासन व्यवस्था की विफलता का स्पष्ट रखांकन है। वास्तविकता तो यह है कि भारत में मुस्लिम और सिख जसे समाज में भी जातियां मौजूद हैं तथा उनमें रोटी-बेटी का सम्बन्ध प्राय: नहीं बनता। ऐसे में क्या यह उचित नहीं होगा कि भारत में समाजशास्त्र की जगह शिक्षण संस्थानों में जातिशास्त्र पढ़ाया जाए ताकि जातियों के सृजन का इतिहास उनका सैद्धांतिक-व्यवहारिक आधार इत्यादि बातें ठीक से जानी-समझी जा सके।ड्ढr डॉ. चन्द्रभूषण अंकुर, गोरखपुरड्ढr पिछड़े ही रहेंगे वेड्ढr स्वतंत्रता प्राप्ति के 60 वर्ष पूर होने के बावजूद देश के पिछड़े वर्ग की स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रारंभ से ही समाज में इन्हें दलित और शोषित वर्ग में रखा गया है। आरक्षण के नाम पर दिया जाने वाला लॉलीपॉप कुछ देर के लिए तो इन्हें चुप करा सकता है लेकिन वह न तो इनका पेट भर सकता है और न ही भविष्य उज्वल कर सकता है।ड्ढr एस. एम. फसी उल्लाह, नई दिल्लीड्ढr क्रिकेट को न कोसेंड्ढr इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत होने से वर्तमान में क्रिकेट का बाजार भारत में चरम पर है। पर लीग में लगे उद्योगपतियों के धन पर कुछ लोग आपत्ति कर रहे हैं कि इससे देश में हॉकी जसे खेल बर्बाद हो जाएंगे। दरअसल इस देश में जो स्थान क्रिकेट का है वह किसी खेल का नहीं है। लोग यह भूल गए हैं कि आज से चार वर्ष पहले भारत में आईपीएचएल (इंडियर प्रीमियर हॉकी लीग) भी शुरू की गई थी, पर उसका क्या हुआ किसी को पता नहीं। आज अगर धोनी 6 करोड़ में किसी शहर के लिए खेलते हैं तो इसलिए नहीं कि वह स्टाइल आइकॉन हैं बल्कि इसलिए कि जो कुछ उन्होंने अब तक क्रिकेट में किया है वह सम्माननीय है। आज अगर भारतीय हॉकी, एथलेटिक्स या अन्य कोई टीम ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतती है, तो ऐसा नहीं है कि उसे तिरस्कृत किया जाएगा। अत: अन्य खेलों के खिलाड़ियों को अपने मन में बसी क्रिकेट के प्रति दुर्भावना को निकालना चाहिए व अपने खेल पर ध्यान लगाना चाहिए ताकि उस मेहनत से वो क्रिकेट को पीछे छोड़ सकें।ड्ढr गोपाम्बुज सिंह, दिल्लीड्ढr चमचामणि का गौरवं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: स्कूलों में जातिशास्त्र पढ़ाया जाए!