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बढ़ती विमान सेवाओं के बीच सुरक्षा सरोकारों की चिंता नही

इस समय देश में दस कॉमर्शियल, दो कार्गो एयरलाइंसों के अलावा उड़ानों का संचालन करने वाली 65 गैर-अधिसूचित एयरलाइन कंपनियां हैं। साथ ही हेलीकॉप्टर सेवाएं देनी वाली कई कंपनियां भी हैं। लगभग इन सभी कंपनियों में विमानों की संख्या में लगातार क्षाफा हो रहा है। सवाल है कि इस विशाल बेड़े की सुरक्षा का लेखा-ाोखा रखने और पायलट व अन्य विमानकर्मियों को लाइसेंस देन की प्रक्रिया के लिए देश में कितने फ्लाइट इंस्पेक्टर हैं। हैरान न हों, जवाब है- महा चार। इस अखबार ने विभिन्न एयरलाइंस कंपनियों के एक्ाीक्यूटिवों और सरकारी अधिकारियों से संपर्क किया तो वे इस बात पर सहमत नजर आए कि एयरलाइंसों में विमानों की मौजूदा संख्या और इनमें नए विमानों को शामिल करने के प्रस्तावों के मद्देनजर कम से कम 25 फ्लाइट इंस्पेक्टरों की जरूरत है। वैसे नागर विमानन महानिदेशक कानू गोहेन ने बताया कि इस तरह के 15 और इंस्पेक्टरों को नियुक्त करने की जरूरी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि ये नियुक्तियां कब तक हो जाएंगी। जो भी हो , देश में विमानों की संख्या 2003-04 के 300 से बढ़कर इस समय करीब 600 हो गई है। दरअसल फ्लाइट इंस्पेक्टरों की जिम्मेदारी सुरक्षा के इंतजामों के अलावा नए विमानों को मंजूरी और पायलटों व चालक दल के सदस्यों को लाइसेंस देना भी होती है। देश की कई घरलू विमान सेवाएं अंतरराष्ट्रीय होती जा रही है और क्षेत्रीय एयरलाइनें भी अस्तित्व में आती जा रही हैं। आगामी चार से पांच साल के भीतर भारतीय विमान कंपनियां करीब 400 विमान खरीदने जा रही हैं। लेकिन ये विमान तभी उड़ान भर सकेंगे, जब फ्लाइट इंस्पेक्टर उनसे जुड़े तमाम सुरक्षा तामझाम की पड़ताल कर लेंगे। नागरिक उड्डयन से जुड़़े एक अधिकारी ने बताया कि हमार पास कॉमर्शियल एयरलाइनों के लिए मात्र तीन फ्लाइट इंस्पेक्टर हैं। ऐसे में देश में उड्डयन विकास की गति को भला कैसे तेज किया जा सकता है अमेरिकी सेवाओं में नियुक्त फ्लाइट इंस्पेक्टरों के बार में कहा जाता है कि वे मामूली से मामूली चूक पर भी बेहद संजीदा रहते हैं। उदाहरण के लिए पिछले सप्ताह 3000 अमेरिकी एयरलाइन उड़ानों को महा इस कारण रद्द कर देना पड़ा कि फ्लाइट इंस्पेक्टरों ने उड़ान से पहले जांच पड़ताल में मामूली चूक पाई थी। लेकिन दूसरी ओर, जसा कि एक घरलू विमान सेवा के इांीनियर ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि भारत में इस तरह की चूकों को अनदेखा कर दिया जाता है। लेकिन उनकी यह भी दलील थी कि भारतीय एयरलाइनें अभी अपेक्षाकृत नई हैं। जाहिर है उनके पास विमान भी नए हैं, इसलिए एक आध मौके पर इस तरह की अनदेखी चल भी सकती है। इधर घरलू विमान यात्रियों की संख्या में लगातार क्षाफे को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों के प्रति संजीदा होने की खास जरूरत महसूस की जा रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक रिटायर्ड अधिकारी जो कि अभी भी मंत्रालय से जुड़े हुए हैं, का सुझाव है कि सरकार चाहे तो प्राइवेट एयरलाइनों के कार्यकारी अधिकारियों को फ्लाइट इंस्पेक्टरों के रूप में मनोनीत कर सकती है ताकि उड्डयन विकास की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

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  • Web Title: विमान सेवाओं के बीच सुरक्षा सरोकार