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नेपाल पहुंचा स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू आज उतना घातक नहीं लगता है,  जितना यह तब सोचा गया था, जब 2009 में पहली बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे महामारी घोषित किया था। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, फ्लू के कारण 2009-10 में पूरी दुनिया में 18,499 लोग मारे गए थे। 2013 में विशेषज्ञों का एक आकलन यह कहता है कि एच1एन1 वायरस के कारण पूरी दुनिया में 2,03,000 लोग मारे गए हो सकते हैं। यानी शुरुआती आकलन से यह दस गुना अधिक है। इसलिए यह फ्लू अब भी चिंता का एक बड़ा कारण है। चूंकि भारत में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं, इसलिए नेपाल में भी इसके संक्रमण के बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, स्वाइन फ्लू ने पूरे देश में 833 लोगों की जान ले ली है, जबकि एच1एन1 वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 14,000 को पार कर गई है। अहमदाबाद में, जो गुजरात का बड़ा शहर है, सरकार ने लोगों को बगैर पूर्व अनुमति के बड़ी संख्या में एक जगह जमा होने पर रोक लगा दी है, ताकि फ्लू के प्रसार को रोका जा सके।

तमिलनाडु में अधिकारियों ने अधिक जोखिम वाले व्यक्तियों, यानी गर्भवती महिलाओं, पहले से बीमार लोगों, बुजुर्गों व दो साल से छोटे बच्चों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने-ले जाए जाने से बचने की अपील की है। नेपाल में आठ लोगों के एच1एन1 वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की गई है और इन सभी ने हाल ही में भारत की यात्रा की थी। इसलिए नेपाल-भारत सीमा पर कैलाली और कंचनपुर में सरकार द्वारा स्वास्थ्य जांच दल को तैनात किया जानासराहनीय कदम है। संक्रमण के मूल में इनफ्लुएंजा वायरस का विकृत रूप है। इनफ्लुएंजा वायरस का संक्रमण इसलिए खतरनाक है, क्योंकि यह कफ, लार आदि से तेजी से फैलता है, खांसने-छींकने व संक्रमित जगह को स्पर्श करने से इसका प्रसार होता है। इसके लक्षण आम बुखार की तरह हैं। इसलिए इस खतरे से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है बचाव। कुछ-कुछ समय के अंतराल पर साबुन से हाथ धोते रहना चाहिए। जो संक्रमित लोगों के इलाज व तिमारदारी में जुटे हैं, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए।   
द काठमांडू पोस्ट,  नेपाल

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