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गुरु की जसी सेवा वैसा ही मेवा

ाो जसी करगा गुरुाी की सेवा वैसा ही पायेगा मेवा। यह सच्चाई गुरुकुल के दिनों की ही नहीं, कम्प्यूटर व इंटरनेट के आज के जमाने में भी झुठलाई नहीं जा सकती। तभी तो राज्यभर में जिस विषय के एक भी शिक्षक नहीं हैं, उस विषय का भी रिाल्ट होता है शत-प्रतिशत। और सभी छात्रों को कम-से कम प्रथम श्रेणी का नंबर भी। यह तल्ख हकीकत है सूबे के उन सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की जहां रडियो से अंग्रेजी की घूंटी पिलाकर निजी स्कूलों से बेहतर प्रोडक्ट निकालने का सपना देख रही है सरकार। आइये, जरा गौर फरमाएं प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाये जाने वाले विषय ललितकला पर। इस विषय के दो भाग होते हैंे, चित्रकला और संगीत।ड्ढr ड्ढr दोनों भागों के लिए 25-25 अंक निर्धारित होते हैं। इस विषय के लिए एक भी शिक्षक राज्य के किसी भी प्राथमिक स्कूल में पदस्थापित नहीं हैं। फिर भी राज्य के किसी स्कूल की रिाल्टशीट देखें तो पता चलेगा कि इस विषय में सबसे कम अंक लाने वाले छात्र को भी 60 प्रतिशत नंबर मिला है। अभिभावक भी इसे ‘कृपांक’ मानते हैं। मजे की बात यह है कि जो छात्र गुरु की जितनी सेवा करता है उसे उतना ही शानदार अंक मिलता है । भले ही वह सब्जेक्टली फेल हो। विभाग के वरीय अधिकारी भी इस मुतल्लिक मुंह खोलने को तैयार नहीं। हालांकि, समस्तीपुर जिलांतर्गत पूसा के जगमोहन विद्यापति आर्ट कॉलेज के संजय कुमार राजा ने जब सूचना के अधिकार के तहत इस विषय से संबंधित जानकारी के लिए आवेदन दिया तो उक्त जिले के डीएसई ने कहा कि उक्त विषय का अलग शिक्षक को बहाल करने का प्रावधान नहीं है। पदस्थापित शिक्षकों में से जिनकी इस विषय में रुचि होती है उन्हीं को पढ़ाने को कहा जाता है। लब्बोलुआब यह है कि जो छात्र- छात्रा जसी करगा गुरुाी की सेवा वैसा ही पायेगा मेवा। ये हुई न बात!

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  • Web Title: गुरु की जसी सेवा वैसा ही मेवा