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पटाखा बनाते समय विस्फोट, तीन मरे

अवैध ढंग से पटाखा निर्माण के दौरान अचानक हुए जबर्दस्त विस्फोट में पति-पत्नी एवं उनकी एक तीन वर्षीया बच्ची की मौत हो गई जबकि तीन बच्चे एवं एक वृद्धा गंभीर रूप से जख्मी हो गई। घटना रविवार दोपहर बारह बजे के करीब यहां से छह किलो मीटर दूर सूर्यपुरा बाजार में हुई। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पटाखा जिस खपरैल मकान में बन रहा था वह मकान एक झटके में ही ध्वस्त हो गया। आसपास के घरों में भी आग लग गई। विस्फोट के बाद भी लगातार छोटे-छोटे सात-आठ धमाके हुए।ड्ढr ड्ढr धमाकों से आसपास का इलाका दहल उठा। कुछ देर बाद जब स्थिति शांत हुई तब विस्फोट से लगी आग को ग्रामीणों ने बुझाना शुरू किया। मलबे से शव निकाले। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस विस्फोट में पटाखा बनाने वाला बलिहार निवासी बत्तीस वर्षीय मो. आजाद, उसकी तीस वर्षीय पत्नी निशा खातून एवं तीन वर्षीय बच्ची मोनी की मौत हो गई जबकि मकान मालिक और उनके तीन पुत्रबुरी तरह जख्मी हो गए। जख्मी चारों लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए पीएमसीएच रफर कर दिया है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने बताया कि मृतक मो. आजाद बलिहार ग्राम के मो. खालिद का पुत्र था। कैमूर के जंगलों में भीषण आग लगीड्ढr सासारामड्ढr दरिगांव थाना क्षेत्र के भोरकड़वा से चार किलोमीटर दक्षिण कैमूर पहाड़ी की जंगलों में शनिवार की रात अगलगी की भीषण घटना घटी। इस घटना में लगभग पांच भैंस के झुलसकर मरने की खबर है। जानकारी के अनुसार रात को आधी रात में कई जगहों से आग की लपटें उठीं और धीर-धीर काफी दूर तक फैल गई।ड्ढr सूत्रों के अनुसार बीच जंगल में एक स्थान पर एक बाड़े में बंधी कुछ भैंसे इन लपटों से घिर गईं और आग की लपटों में झुलस कर मर गईं। यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि भैंस कहां की थीं। उधर इस घटना में महुआ, बांस, गम्हार आदि के सैकड़ों पेड़ जलकर नष्ट हो गये हैं, जिनकी कीमत लाखों में है। घटना की जानकारी से प्रशासन और वन विभाग इंकार कर रहा है। जानकारों के अनुसार जलने वाली भैंसे पिछले बरसात के दिनों से ही इन जंगलों में चराने के लिए लाई गईं थीं। उधर इस घटना से आतंकित जंगलों की पशुपालक जंगल छोड़कर पलायन कर रहे हैं। इस संदर्भ में जंगल से लौट रहे रामपुर-दिनारा के पशुपालक शिवबदन ने बताया कि पहले भी जंगल में आग लगी थी, लेकिन शनिवार की आग काफी भीषण थी। उसने बताया कि और भी कई पशुपालक पलायन कर चुके हैं। मालूम हो कि गत दिनों इन जंगलों के राजा तालाब,भुलड़ी आदि स्थानों पर आग लगी थी।

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