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अनाज के बैकलॉग उठाव पर प्रतिबंध

ालाबाजारी पर काबू पाने के लिए केन्द्र ने राज्यों में खाद्यान्न योजना के अनाज के बैकलॉग उठाव पर प्रतिबंध लगा दिया है। नयी व्यवस्था में अनाज का उठाव 50 दिनों के भीतर सुनिश्चित कराना होगा। अन्यथा उस माह का कोटा लैप्स हो जायेगा। डिपो में अनाज नहीं होने पर राशन दुकानदारों को किसी दूसर डिपो से अनाज दिलाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर थोप दी गयी है। मतलब, गोदाम में अनाज नहीं रहने पर राज्य सरकार अब सीधे-सीधे केन्द्र पर निशाना नहीं साध पायेगी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को केन्द्र के फरमान के अनुरूप कार्रवाई के निर्देश दे दिये हैं।ड्ढr ड्ढr आमतौर पर ऐसा देखने में आता है कि राशन दुकानदार दो-दो माह तक अनाज का उठाव नहीं करते, और अचानक बैकलॉग के साथ उठाव किया जाता है। इससे कालाबाजारी की आशंका बढ़ने के साथ ही खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य भी बाधित होता है। नयी व्यवस्था में डिपो में अनाज नहीं रहने और उसकी कीमत का अग्रिम भुगतान होने पर ही 15 दिन का अवधि विस्तार मिलेगा। यह निर्णय अब एफसीआई के जिला प्रबंधक की बजाय क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक करंगे। अगर राज्य को किसी कारण इससे ज्यादा अवधि विस्तार की जरूरत होगी तो उसे ठोस आधार के साथ केन्द्र का दरवाजा खटखटाना होगा। एफसीआई संबंधित राज्य को आवंटित गेहूं-चावल के कोटे में कोई फेरबदल नहीं कर सकेगा। केन्द्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की निदेशक (बीपी) अंजू निगम ने सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को हिदायत दी है कि बीपीएल, अन्त्योदय, अन्नपूर्णा और एपीएल योजना के अनाज का उठाव आवंटन माह के पिछले माह की पहली तारीख से आवंटन माह वाले 20 तारीख तक हो जाना चाहिए। इसके लिए संबंधित माह की 15 तारीख तक अनाज की पूरी कीमत का बैंक ड्राफ्ट जमा कराना होगा।

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