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दो टूक

झारखंड विधानसभा फिाूलखर्ची का अड्डा बन गयी है। ऐसा स्थापनाकाल से ही है। ताजा उदाहरण है विधानसभा के पिछवाड़े में सड़ रहे दस लाख के फर्नीचर। मार्च महीने के फंड सरंडर से बचते हुए आनन-फानन में स्थानीय सप्लायर से फर्नीचर खरीद लिये गये। यह भी नजरंदाज कर दिया गया कि खरीद होनी चाहिए थी ब्रांडेड कंपनी से। झारखंड जसे गरीब राज्य में, जहां लोग दो जून की रोटी के लिए तरसते हैं, सरकारी खजाने का ऐसा दुरूपयोग शर्मनाक है। सरकारी नियमों को अंगूठा दिखाते हुए जनता की गाढ़ी कमाई में सेंध लगाने वाले की पहचान होनी चाहिए इससे पहले कि दोषियों को संरक्षण का लांछन इस विधानमंदिर और इसके पुरोहित की गरिमा को शर्मसार कर।

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