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नेपाली फौचा में भर्ती होंगे माओवादी

नेपाल में सदियों से राजशाही के प्रति निष्ठावान रही शाही सेना को अब अपने चाल-चलन में बदलाव करते हुए माओवादियों को सेना में शामिल करने माओवादी विद्रोहियों को सेना के साथ खड़ा करना बेहद संवेदनशील है, लेकिन शांति समझौते की मूल भावना के तहत ऐसा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह माओवादियों को सेना में शामिल करना भविष्य की अपनी चुनौतियों में सर्वोपरि मानते हैं। गौरतलब है कि राजशाही के खिलाफ दशकों से खूनी संघर्ष कर रहे माओवादियों ने शांति समझौते के हथियार रखकर अपने लड़ाके संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले शिविरों में भेज दिए थे और देश में नई राजनीतिक प्रक्रिया की शुरूआत के लिए चुनाव में हिस्सा लिया। भट्टराई ने कहा, ‘हमने पहले ही फैसला कर लिया है कि पहले से मौजूद सेना और माओवादियों की फौज को मिलाकर नई सेना खड़ी की जाएगी।’ उन्होंने चेतावनी के अंदाज में कहा कि सेना निर्वाचित नेतृत्व पर सवाल नहीं उठा सकती और उसे माओवादी लड़ाकों को अपने साथ शामिल करने के लिए तैयार रहना होगा। भट्टाराई ने कहा कि देश में समूची व्यवस्था को पुर्नसगठित करना होगा। उन्होंने कहा कि अब तक नरेश द्वारा सेना का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब राजशाही के दिन लद गए हैं, इसलिए सेना को राजनीतिक नेतृत्व का अनुसरण करना चाहिए। दूसरी तरफ सेना की ओर से स्पष्ट कह दिया गया है कि वह आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया का पालन करेगी। सेना के इस बयान से स्पष्ट है कि वह अधिसंख्य माओवादी लड़ाकों को सेना में शामिल करने के लिए तैयार नहीं है।ड्ढr सेना के प्रवक्ता ने कहा कि सेना एक गैर-राजनीतिक संगठन है और सभी को सेना के चरित्र की इस खासियत का सम्मान करना चाहिए। सेना में शामिल होने की विधिवत प्रक्रिया है। इसमें भर्ती होने के लिए वांछित शर्तो को पूरा करना ही होगां

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