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ब्लैकबेरी मसले के हल में लग सकता है वक्त

ब्लैक बेरी के भारत में सरकार की शर्तो पर अपनी सेवाएं देने का मसला सुलझने में वक्त लग सकता है। अब ब्लैकबेरी का निर्माण करने वाली कंपनी रिसर्च इन मोशंस (आरआईएम) ने अलग राग अलापना शुरू कर दिया है। उसका कहना है कि भारत सरकार उससे क्यों कह रही है कि वे अपने सर्वर इधर लगाए ताकि ब्लैक बेरी पर आने वाले ई-मेल संदेशों को पढ़ा जा सके। कायदे से उसे अपनी किसी भी चिंता के हल के लिए उन मोबाइल ऑपरटरों से बात करनी चाहिए जो हमार जरिए भारत के चार लाख कस्टमर्स को ब्लैक बेरी की सर्विस दे रहे हैं। आरआईएम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत में क्रमश: भारती, रियालंस, बीपीएल और वोडाफोन हमारी सर्विस दे रहीं है। बेहतर होगा कि सरकार इनसे बात कर ले। हमारा भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को आरआईएम के दिल्ली में पिछले कई दिनों से जमे हुए आला अधिकारियों ने संचार विभाग के अफसरों से संचार भवन में बात की। बातचीत में सेल्युलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि भी थे। बातचीत संक्षिप्त रही। सूत्र दावा कर रहे हैं कि सरकार भी मसले के हल को जल्दी से सुलझाने को लेकर जल्दी में नहीं है। भले ही बीच-बीच में किसी सरकारी अफसर या मंत्री का बयान बेशक से आ जाए कि अगर ब्लैकबेरी ने सरकार की चिंताओं का हल न पेश किया तो उसकी सेवाओं पर रोक लगाई जा सकती है। इस बीच,सूत्रों का कहना है कि टाटा समूह किसी भी सूरत में सरकार से हरी झंडी मिलने से पहले अपनी ब्लैकबेरी सर्विस चालू नहीं करगा।

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  • Web Title: ब्लैकबेरी मसले के हल में लग सकता है वक्त