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ग्रामीण भारत बना दवा का बड़ा बाजार

दवा निर्माता कंपनियों के लिए ग्रामीण भारत एक बड़े बाजार के रूप में उभर रहा है। मात्र तीन सालों के भीतर ही भारतीय ग्रामीण बाजार में औषधि कारोबार दोगुना हो गया है। वर्ष 2004 में जहां यह 348 करोड़ रुपए था, वहीं 2007 में बढ़कर 662 करोड़ रूपए हो चुका है। रिसर्चर सलाहकार कंपनी ‘ओआराीआईएमएस’ ने अपने सव्रे के आधार पर आंकड़े दिए हैं कि वर्ष 2004 में ग्रामीण क्षेत्र के दवा बाजार में 11.3 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई जो सन् 2007 में बढ़कर 13.6 प्रतिशत हो गई है। यह एक रिकार्ड बढ़ोतरी है। यही ट्रेंड यदि जारी रहा तो अगले कुछ सालों में यह समूचे बाजार के एक चौथाई हिस्से को हड़प लेगा।ड्ढr ओआराीआईएमएस के एमडी शैलेश गद्रे मानते हैं कि दवा निर्माता कंपनियों के लिए आगे का समय ग्रामीण भारत पर खास निगाहें टिकाने का होगा। उनके मुताबिक, बेशक अन्य उत्पाद बनाने वाली और नई उभरती कंपनियों के लिए देश का ग्रामीण बाजार काफी बढ़ेगा लेकिन उनके मुकाबले दवा निर्माता कंपनियां खासा दबदबा बनाने में कामयाब रहेंगी। बहुराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों ने पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों की पहचान एक बड़े बाजार के रूप में कर दी है। फाक्षर और जीएसके जसी कंपनियां ग्रामीण क्षेत्र में अपनी पैठ को और व्यापक बनाने की रणनीति तैयार कर रही हैं।

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