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ऐसे कैसे सुधरंगे मेडिकल कॉलेज

प्रदेश के पाँच राजकीय मेडिकल कालेजों का बुरा हाल है। इन मेडिकल कालेजों के लिए करीब 185 करोड़ रुपए का बजट था। लालफीता शाही के चलते नई योजनाओं की करीब 50 फीसदी बजट राशि बीते वर्ष सरंडर कर दी गई।ड्ढr प्रदेश के राजकीय मेडिकल कालेजों के हालात इतने अधिक खराब हैं कि मेडिकल काउंसिल आफ इण्डिया आए दिन धमकी देती रहती है कि हालात न सुधार गए तो मेडिकल डिग्रियों की मान्यता खत्म कर दी जाएगी। इसके बावजूद बजट होते हुए भी मेडिकल कालेजों की दशा सुधारने में चिकित्सा शिक्षा विभाग नाकारा साबित हो रहा है।ड्ढr सरकारी तंत्र का पूरा जोर लखनऊ के चिकित्सा संस्थानों पर ही केंद्रित रहता है। प्रदेश के अन्य महानगरों के राजकीय मेडिकल कालेजों की तरफ खास ध्यान नहीं है। यह विभाग पहले संसदीय कार्य मंत्री लालजी वर्मा के पास था। करीब तीन महीने पहले मुख्यमंत्री ने उनसे ले लिया। साथ ही इस विभाग का सचिव भी बदल दिया था।ड्ढr विभाग की लचर कार्यप्रणाली के कारण बीते वित्तीय वर्ष की समाप्ति के समय इन मेडिकल कालेजों के मद के लिए तय 78 करोड़ की राशि लैप्स हो गई। इसके अलावा करीब 45 करोड़ रुपए की राशि पी.जी.आई. को दे दी गई जबकि पी.जी.आई. के विकास के लिए 130 करोड़ रुपए का अलग बजट था।ड्ढr पाँच राजकीय मेडिकल कालेजों कानपुर, गोरखपुर, झाँसी, मेरठ और आगरा के साथ ही प्रस्तावित आजमगढ़ मेडिकल कालेज की नई योजनाओं के लिए कुल 185 करोड़ रुपए बजट था। यह राशि मेडिकल कालेजों में भवन निर्माण और उपकरणों की खरीद के अलावा शिक्षकों के नए पदों पर भर्ती के लिए थी। बीते वित्तीय वर्ष के शुरू के नौ महीनों में इन मेडिकल कालेजों की नई योजनाओं के लिए मात्र 25 फीसदी धनराशि की ही शासन स्तर से स्वीकृति दी गई थी। नतीजा यह हुआ कि वर्ष के अन्त में बीते मार्च महीने में करीब 123 करोड़ रुपए सरंडर करने की नौबत आ गई।

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  • Web Title: ऐसे कैसे सुधरंगे मेडिकल कॉलेज