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सुशील मोदी के पक्ष में उतरे नीतीश

मंत्रिमंडल विस्तार को मुद्दा बनाकर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की कुर्सी हिलाने में जुटे ‘एंटी मोदी’ भाजपाइयों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जोर का झटका दिया है। मोदी के पक्ष में खुलकर उतर मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भाजपा की घटनाओं से सरकार या गठबंधन पर कोई खतरा नहीं है। मंत्रियों को कौन विभाग मिले, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है जबकि विस्तार का निर्णय गठबंधन के दोनों दलों का था। इसके लिए मोदी कैसे जिम्मेदार हो गये? मंत्रिमंडल के आकार संबंधी कानूनी बाध्यता से हो रही ‘दिक्कतों’ का हवाला देकर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कोई विस्तार नहीं होगा। उन्होंने माना कि कर्नाटक में भाजपा और जदयू से संबंधों में कुछ कड़वाहट आ गयी है जो जल्द ही दूर कर ली जायेगी।ड्ढr ड्ढr सोमवार को जनता दरबार में श्री कुमार ने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार बनने के समय ही यह तय हो गया था कि दोनों दलों से कितने मंत्री होंगे और किसको कौन विभाग मिलेगा? विस्तार के बाद नये-पुराने सभी मंत्रियों ने अपना काम आरंभ कर दिया है। ऐसे अवसरों पर तो साधारण टीका-टिप्पणी होती ही रहती है। इसमें बहुत कुछ तलाशने की जरूरत नहीं है। उप मुख्यमंत्री के कैबिनेट विस्तार संबंधी बयान को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विस्तार कहां होना है? मंत्रिमंडल में 36 मंत्री ही रखे जा सकते हैं। वह संख्या पूरी हो गयी है। इस बाबत कानूनी बाध्यता से सबको दिक्कत हो रही है लेकिन सीमा बढ़ाने जैसी मांग की बजाय हम ‘न्यूट्रल’ रहेंगे।ड्ढr ड्ढr यह पूछने पर कि मंत्रिमंडल विस्तार से मोदी का कद घटा है, श्री कुमार ने कहा कि कद बढ़ा या घटा, फीता लेकर मापने वाले दूसर लोग होते हैं। हम तो ‘न्याय के साथ विकास’ के अभियान में सबको साथ लेकर आम सहमति से काम कर रहे हैं।

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