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27 जनवरी, 2020|8:36|IST

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काश, दूसर खेलों में भी दिखे इसी तरह की स्पिरिट

बेशक ये क्रिकेट का जोश और जुनून ही है जो सिर्फ 20-20 ओवर के मैच के लिए भी लोगों को देर रात मैदान तक खींच लाने में सफल हुआ है। शायद क्रिकेटप्रेमियों ने इसको इतनी जल्दी स्वीकार भी इसीलिए किया क्योंकि उन्हें पूर दिन के क्रिकेट का मजा सिर्फ चार या पांच घंटे में ही मिल रहा है। फिर ये मैच बहुत रोमांचक हैं। मैंने जो मैच देखे, इतना मजा आया कि बीच में छोड़ने का भी मन नहीं था। एसे में जो लोग स्टेडियम में देखते हैं, उनको लाइटिंग, चमक-दमक, चकाचौंध और उस माहौल का जो एहसास होगा उसे तो शायद वो भी बयां नहीं कर सकें। वैसे क्रिकेट को धर्म मानने वाले इस देश में क्रिकेट के लिए लोगों में आईपीएल के लिए ये जोश कोई अनोखा नहीं है। क्रिकेट के नाम पर तो वे पूर दिन काम के बाद भी देर रात को होने वाले मैचों का मजा लेने के लिए तैयार रहते हैं। शायद यही वजह है कि आयोजकों ने इसका वक्त रात में रखा है ताकि वे आफिस के बाद घर आकर पूर परिवार के साथ इस रोमांचक खेल का पूरा आनंद उठा सकें। हां, एक बात जरूर है कि अगर मुकेश अंबानी, विजय माल्या, शाहरुख खान या बॉलीवुड की अन्य हस्तियां एसा ही इनवेस्टमेंट बैडमिंटन या फिर अन्य खेलों में भी करं तो उनमें भी छुपी प्रतिभाएं सामने आएंगी। बेशक उसके लिए वे ये जरूर देखेंगे कि उससे उनको क्या फायदा होगा। फिर भी मैं ये कहूंगा कि अगर वे एसा कोई कदम उठाएं तो ये दूसर खेलों के हित में बहुत अच्छा होगा। बस सारी बात इस पर निर्भर करती है कि आप दूसर खेलों को किस तरह से देखते हैं। जब हैदराबाद में 6 अप्रैल को इंडिया ओपन बैडमिंटन का फाइनल था, उस दिन हैदराबाद में आईसीएल का मैच था। उसके बावजूद लोग टिकट लेकर मेरा मैच देखने शहर से काफी दूर गाची बाउली स्टेडियम में आए। काफी लोग तो आसपास के इलाकों से भी आए थे। यानि अगर आप दूसर खेलों के बार में सोचेंगे तो उसमें भी काफी स्कोप मिल सकता है। बस पहले उस खेल को थोड़ा सा प्रमोट करने की जरूरत है।

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  • Web Title: काश, दूसर खेलों में भी दिखे इसी तरह की स्पिरिट