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गांव की छुई-मुई बनी प्रोजेक्ट मैनेजर

बिहार के बांका जिले के एक छोटे से गांव में जन्मी मीनाक्षी अब घर की गाड़ी खींचने में अपने शिक्षक पिता का साथ देगी। एक्सआइएसएस में रूरल डेवलपमेंट की अंतिम वर्ष की छात्रा मीनाक्षी कुमारी चौधरी को गुजरात की राष्ट्रीय स्तर की संस्था फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी ने प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर 17 हाार रुपये प्रतिमाह की नौकरी दी है। वह कहती है अपने पिता का साथ देगी। मीनाक्षी के पिता नवल किशोर चौधरी डीएवी स्कूल धुर्वा में गणित के शिक्षक हैं। वह बताते हैं कि 1में नौकरी की तलाश में रांची आये थे। कुछ दिनों तक टय़ूशन पढ़ा कर गुजारा किया, फिर 1में सेंट्रल एकेडमी, कांके में नौकरी मिली। परिवार गांव में ही रहता था। परिवार को 1में रांची लेकर आये। तब मीनाक्षी गांव में हिंदी माध्यम के भद्रनगर प्राइमरी स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा थी। रांची के सेंट्रल एकेडमी में जब उसका दाखिला कराया, तब भाषा की समस्या सामने आयी, पर मीनाक्षी ने हार नहीं मानी। मैनेजमेंट एप्टीटय़ूड टेस्ट पास कर उसने एक्सआइएसएस में दाखिला लिया। मीनाक्षी बताती है कि भाषा की समस्या के बावजूद उसने कभी टय़ूशन का सहारा नहीं लिया। एक्सआइएसएस में दाखिले के समय भी काफी दिक्कतें आयी थी। पिता की सीमित आय और उनके पास कोई चल-अचल संपत्ति नहीं रहने के कारण बैंकों ने शिक्षा ऋण देने से इनकार कर दिया। मीनाक्षी की कहानी किसी हिंदी स्कूल में पढ़ाई शुरू कर अंग्रेजी माध्यम के संस्थानो में अपनी प्रतिभा साबित करने और मध्यमवर्गीय परिवार की एक लड़की के गंवई पृष्ठभूमि से निकल कर देश की आर्थिक मुख्य धारा में शामिल होने की कहानी भी है।

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  • Web Title: गांव की छुई-मुई बनी प्रोजेक्ट मैनेजर