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4 अप्रैल, 2020|4:17|IST

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दो टूक

प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह के झारखंड आगमन पर विपक्षी भाजपा ने विरोध का कार्यक्रम बनाया है। राजनीतिक दृष्टि से यह नौटंकी के सिवा कुछ नहीं। विपक्षी विरोध की यह रस्मअदायगी, ऐसे विपक्ष को कितना शोभा देगी जो खुद केंद्र से लेकर राज्य तक सरकारं चला चुका है। भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की महती सकारात्मक भूमिका के कई उदाहरण हैं। धुरंधर विरोधियों के जमावड़े वाले आगे बढ़ते बिहार को देखें, या फिर पश्चिम बंगाल की जनता के हित में ममता बनर्जी और बुद्धदेव भट्टाचार्य का एक मंच पर पहुंचना। सकारात्मक इच्छाशक्ति वाला मजबूत विपक्ष कायाकल्प कर सकता है। मौका है, भाजपा नौटंकी छोड़, प्रखर विपक्ष के रूप में झारखंड में भी कुछ उदाहरण पेश कर।