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सरकार को अच्छे अनाज उत्पादन का भरोसा

यह एक ऐसी घोषणा है, जो बाजार में खाद्य पदार्थो की बढ़ती कीमत और कृषि की ठीक से सुध न लेने के लिए सरकार पर पड़ रहे दबाव दोनों को हलका बना सकती है। केंद्र ने मंगलवार को यह दावा किया कि इस साल देश में अनाज का उत्पादन पिछले साल सेएक करोड़ टन ज्यादा होने का अनुमान है। महा ढाई माह पहले ही सरकार के खुद के अनुमानों ने कृषि उत्पादन की बहुत ही दयनीय तसवीर पेश की थी। लेकिन मंगलवार को केंद्रीय कृषि सचिव पी. के. मिश्रा ने वर्ष 2007-08 के दौरान अनाज उत्पादन का तीसरा अग्रिम अनुमान पेश किया। इसमें दावा किया गया कि इस अवधि में चावल, गेहूं, तिलहन, कपास और मोटे अनाज का रिकार्ड उत्पादन होगा। हालांकि अनुमानों के मुताबिक, सरसों के तेल के उत्पादन और चीनी के उत्पादन में गिरावट दिखाई गई है। नए अनुमानों के अनुसार, 2007-08 में गेहूं का उत्पादन सात करोड़ 67 लाख 80 हाार टन होगा, जबकि 2005-06 में यह सात करोड़ 58 लाख 10 हाार टन हुआ था। असी तरह चावल का उत्पादन भी 2005-06 के दौरान नौ करोड़ 33 लाख 50 हाार टन के मुकाबले नौ करोड़ 56 लाख 80 हाार टन होगा। मक्का के उत्पादन में 34 लाख 40 हाार टन की बढ़ोतरी का अनुमान है, जब कि दालों में यह बढ़ोतरी 10 लाख टन तक होगी। अनाज का कुल उत्पादन पिछले साल के 21 करोड़ 72 लाख 80 हाार टन के मुकाबले 22 करोड़ 73 लाख 20 हाार टन होगा। यह पूछने पर कि अनुमानों में आखिर इतना उतार-चढ़ाव कैसे आया, मिश्रा ने कहा कि कृषि उत्पादन का अनुमान उतना सटीक नहीं होता जितना कि औद्योगिक उत्पादन का होता है। उनके मुताबिक, कृषि क्षेत्र की इस उाली तस्वीर में पिछले मानसून का अच्छा होना प्रमुख है। रबी के मौसम के दौरान ठंडक ने गेहूं के उत्पादन को बढ़ाने में मदद दी। इसके अलावा कम उत्पादकता वाले जिलों में अच्छे किस्म के बीज मुहैया कराने के सरकारी प्रयासों ने भी रंग दिखाया। यह पूछने पर कि क्या उत्पादन में इस बढ़ोतरी से गेहूं के आयात की जरूरत नहीं रह जाएगी।ं

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  • Web Title: सरकार को अच्छे अनाज उत्पादन का भरोसा