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डॉक्टरों ने फिर तररी आँखें

चिकित्सा विश्वविद्यालय के डॉक्टर शासन से खफा हैं। शासन ने 20 अप्रैल तक डॉक्टरों की माँगों को पूरा किए जाने का आश्वासन दिया था। माँग न पूरी होने से खफा डॉक्टर 24 को आम सभा की बैठक में आंदोलन की रुपरखा तय करंगे। 25 से ेसामूहिक अवकाश लेकर इमरोंसी भी बंद किए जाने की तैयारी है। इसकी जानकारी डॉक्टरों ने कुलपति डॉ. सरो चूड़ामणि गोपाल को दे दी है।ड्ढr मंगलवार को शिक्षक एसोसिएशन की कार्यकारिणी बैठक में डॉक्टर शासन के रवैये से खासा नाराज दिखे। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. एके सिंह का कहना है कि आश्वासनों की भी हद होती है। शासन अब तक दर्जनों बार डॉक्टरों को आश्वासन की घुट्टी पिला चुका है। कार्यकारिणी बैठक में डॉक्टरों ने तय किया कि इस बार का आंदोलन तभी थमेगा जब उनकी माँगों को मान लिया जाएगा।ड्ढr तय हुआ कि इसी हफ्ते से सभी डॉक्टर एक बार फिर से सामूहिक अवकाश ले लेंगे। यह भी तय हुआ कि इस बार इमरोंसी सेवाओं को भी नहीं चलाया जाएगा। इस पर अंतिम निर्णय 24 को डॉक्टरों की आम सभा की बैठक में होगा। दरअसल 28 अप्रैल को प्राइवेट प्रैक्िटस के मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई भी होनी है। हाईकोर्ट ने चिविवि प्रशासन से पूछा है कि डॉक्टर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले सकते हैं या नहीं? एक्ट केड्ढr अनुसार डॉक्टरों को वीआरएस नहीं मिल सकता। अधिकतर डॉक्टर नौकरी से इस्तीफा की बजाय वीआरएस चाहते हैं। यही वजह है कि शासन पर दवाब बढ़ाने के लिए डॉक्टर 28 से पहले ही सामूहिक अवकाश लेने की रणनीति तयड्ढr करें।

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