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नालों से निकले गाद के आधार पर अब पेमेंट

जलजमाव से परशान राज्य सरकार ने नालों की सफाई नीति ही बदल दी है। पटना शहर की जल निकासी के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त व जरूरी ‘बादशाही नाले’ की शीघ्र सफाई के लिए उसे वापस जल संसाधन विभाग को सौं प दिया गया है। कंकड़बाग ड्रनेज परियोजना के निर्माण के लिए एनबीसीसी को रोज 2 घंटे काम करने का निर्देश दिया गया है। कार्यो की साप्ताहिक मानीटरिंग की जिम्मेवारी डीएम, एसपी, निगमायुक्त एवं विद्युत बोर्ड के इंजीनियरों की संयुक्त टीम को सौंपी गयी है। नगर विकास मंत्री भोला प्रसाद सिंह कहा है कि कार्यो के लिए सभी जिम्मेवार लोगों को बता दिया गया है कि-‘हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे।’ड्ढr ड्ढr मंगलवार को जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अजय वी. नायक एवं पटना नगर के निगमायुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बादशाही नाला के मामले पर उक्त निर्णय किया। मामले की जानकारी देते हुए नगर विकास मंत्री ने बताया कि पटना के सभी नौ बड़े नालों की सफाई के लिए टेंडर के माध्यम से कार्यादेश आवंटित कर दिया गया है। पर इस बार नालों की सफाई सही हो, इसके लिए नालों से निकले गाद की मात्रा के आधार पर पेमेंट करने का आदेश दिया गया है। इससे नालों से कितने गाद निकले यह तो पता चलेगा ही, नालों की सफाई सही हुई या नहीं यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा।ड्ढr श्री सिंह ने कहा कि बेउर से पहाड़ी सम्प हाउस तक करीब सात किमी. लम्बे बादशाही नाला की सफाई का जिम्मा पटना नगर निगम ने खुद ले लिया था पर उसकी सफाई नहीं कर पा रहा था। विभाग ने निर्णय किया कि नाले को वापस जल संसाधन विभाग को लौटा दिया जाए। जल संसाधन विभाग ने नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को मान लिया है और तत्काल एक करोड़ रुपए से उसकी सफाई कराने का फैसला किया है।ं

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