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डीएम के निर्देशों को ठेंगा दिखा रहे अफसर

बैठकों में जिलाधिकारी द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का पालन कागजों पर भी नहीं हो रहा है। हर महीने होने वाली बैठकों में उन्हीं पुराने आंकड़ों को पेश कर पदाधिकारी छुट्टी पा लेते हैं। जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अभी तक जिले में सिंचाई के प्रमुख साधन नलकूपों को ठीक करने के कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा है। कृषि पर राज्य सरकार की प्राथमिकता को देखते हुए, जिलाधिकारी ने कृषि टास्क फोर्स की बैठकों में पदाधिकारियों को सिंचाई की सुविधा मुहैया करने का निर्देश दिया। पिछली बैठक में भी जिलाधिकारी ने हर सप्ताह एक नलकूप को ठीक करने का आदेश दिया था।ड्ढr लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात।ड्ढr ड्ढr जिला स्तरीय कृषि टास्क फोर्स की पिछले साल चार दिसंबर को हुई बैठक में नलकूप प्रमंडलों द्वारा जो आंकड़े पेश किए गए हैं, उसके मुताबिक जिले में कुल 653 नलकूपों में से 386 खराब हैं। इनमें ज्यादातर नलकूप यांत्रिक और विद्युत दोष के कारण खराब हैं। जिले में नलकूप के कुल तीन प्रमंडल हैं, जिसमें बाढ़ प्रमंडल में छह प्रखंड शामिल है। इस प्रमंडल के अंतर्गत कुल 154 नलकूपों में 84 खराब हैं। जबकि दिसंबर में खराब नलकूपों की संख्या 80 थी। पटना पूर्वी प्रमंडल के जिम्मे सबसे ज्यादा नौ प्रखंडों के नलकूपों के देखरख की जिम्मेवारी है।इसकी भी स्थित कमोबेश वही है। दिसंबर में इस प्रमंडल में खराब नलकूपों की संख्या 148 थी, चार महीने में इस आंकड़े में छह नलकूप की कमी आई है। पटना पश्चिम प्रमंडल के छह प्रखंडों में कुल 267 में से मात्र 152 नलकूप चालू हालत में हैं, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 158 था।

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