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प्रैक्िटस भी की, अब फंसे

रिम्स के कई डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्िटस जारी है। हालांकि प्रैक्िटस नहीं करने की एवज में इन डॉक्टरों ने राज्य सरकार से करीब 4.50 करोड़ रुपये भी ले लिये। रिम्स में नवंबर 2002 से नन प्रैक्िटस लागू की गयी। इसके बाद ही प्राइवेट प्रैक्िटस की मनाही कर दी गयी। डॉक्टरों को यह निर्देश भी था कि वे हर माह अपनी वेतन स्लिप के साथ यह शपथ पत्र देंगे कि वे प्राइवेट प्रैक्िटस नहीं कर रहे। इस एवज में इन डॉक्टरों को मूल वेतन (वेतन+50 प्रतिशत महंगाई भत्ता) का 25 प्रतिशत एनपीए अलग से देना तय हुआ। मजे की बात है कि बढ़ा वेतन शपथपत्र के साथ तो ले लिया, लेकिन कई डॉक्टर प्रैक्िटस भी करते रहे। अब निगरानी ने रिम्स के 20 डॉक्टरों को चिह्नित किया गया, तो हड़कंप मच गया है। रिम्स अधिकारियों के मुताबिक डॉक्टरों को जून 2005 से एनपीए देना शुरू किया गया। जून 05 से लेकर जून 07 के बीच इन्हें 3,82,75,280 रुपये एनपीए के रूप में भुगतान किये गये। चिकित्सकों को नवंबर 2002 से लेकर मई 2005 की अवधि के एरियर के रूप में मोटी राशि भी दी गयी है। कुल मिलाकर रिम्स चिकित्सकों को साढ़े चार करोड़ रुपये एनपीए के रूप में दिये जा चुके हैं। निगरानी विभाग ने इसे वित्तीय अनियमितता माना है और चिह्नित डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमे की अनुमति सरकार से मांगी है। निगरानी को हरी झंडी दे दी है: भानू ्नराज्य के स्वास्थ्य मंत्री भानूप्रताप शाही ने कहा है कि सरकार ने प्राइवेट प्रैक्िटस कर रहे डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हरी झंडी दे दी है। रिम्स के डॉक्टर एनपीए लेंगे, प्रैक्िटस भी करंगे, नहीं चलेगा। इधर निगरानी द्वारा सौंपी गयी सूची में चार और डॉक्टरों के नाम जुड़ गये हैं। इनमें डॉ आरके झा (मेडिसिन), डॉ चंद्रमोहन (रेडियोलॉजी) सहित दो अन्य चिकित्सक शामिल हैं। निगरानी की लिस्ट में शामिल डॉक्टरों के नाम डॉक्टरनवंबर 2002 से जून 2007 तक डॉ जितेंद्र सिंह2,3005 रु. डॉ चंद्रकांत2,83,5. डॉ रांीत सिंह2,066 रु. डॉ एसके तुलस्यान2,15,504 रु. डॉ पीके सिंह2,34,165 रु. डॉ एलबी मांझी2,05,618 रु. डॉ शीतल मलुवा2,06,702 रु. डॉ डीके सिन्हा1,. डॉ उमेश प्रसाद2,10,787 रु.

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