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लविवि के प्रति कुलपति हटाए गए

सीपीएमटी की तैयारी और मुख्य परीक्षाओं के बीच ही लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रति कुलपति प्रो. आरएस यादव को उनके दायित्व से मुक्त कर दिया। प्रो. यादव के स्थान पर बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. यूएन द्विवेदी की नियुक्ति की गई है। प्रो. यादव वाणिज्य संकाय के डीन व विभागाध्यक्ष के पद पर कार्य करते रहेंगे। माना जा रहा है कि 30 अप्रैल को प्रस्तावित कार्य परिषद की बैठक के पूर्व कई और महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल होंगे।ड्ढr लविवि के शिक्षक समुदाय में इस फेरबदल को हाल ही में पेपर लीक मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। पेपर लीक मामले में जस्टिस भार्गव न्यायिक जाँच कर रहे हैं और जल्दी ही इसकी रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। हालाँकि लविवि प्रवक्ता डॉ. मनोज दीक्षित ने इस फेरबदल को सामान्य करार दिया है, लेकिन जिन परिस्थितियों में प्रोटोकाल के लिहाज से दूसर नम्बर के पद पर फेरबदल हुआ उसे सामान्य नहीं माना जा रहा है। कुलपति ने इससे पूर्व जिन भी पदों पर फेरबदल किया है उसमें कहीं न कहीं अनियमितताएँ उाागर होने की बात सामने आई थी। आठ फरवरी को जब पेपर लीक हुआ उस समय प्रो. यादव ही कार्यवाहक कुलपति के रूप में काम कर रहे थे। प्रो. बरार ने हिन्दुस्तान से विशेष बातचीत में कहा था कि वे इस मामले में जल्दी ही निर्णय लेंगे और दोषी कितना ही बड़ा क्यों न हो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कॉपी ट्रांसप्लांट मामले में भी 10 दिन के भीतर कार्रवाई की बात कही थी। पेपर लीक मामले में एक स्ववित्तपोषित कॉलेज का नाम प्रकाश में आ रहा है। इसके कर्ताधर्ता विश्वविद्यालय से जुड़े रहे हैं। प्रो. यादव के पिछले ढाई वर्ष के कार्यकाल के दौरान बड़ी संख्या में स्ववित्तपोषित कॉलेजों को मान्यता दी गई। इन कॉलेजों में तमाम ऐसे लोगों की सीधी भागीदारी है जो या तो लविवि में कार्यरत हैं या रहे हैं। इसके अलावा प्रो. यादव वाणिज्य संकाय के डीन व विभागाध्यक्ष हैं और इसी विषय का पेपर लीक हुआ था।ड्ढr नए बनाए गए प्रतिकुलपति प्रो. यूएन द्विवेदी ने विश्वविद्यालय में बायोटेक की पीजी कक्षाएँ शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।ड्ढr उन्हें नब्बे के दशक में नोबलड्ढr प्राक्ष के लिए भी नामित किया गया था। प्रो. द्विवेदी ने बुधवार को पदभार ग्रहण करने के बाद बताया कि कुलपति की प्राथमिकताएँ ही उनकी भी प्राथमिकताएँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक दायित्वड्ढr के बावजूद वे नियमित कक्षाएँ लेते रहेंगे।

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