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निजी कंपनियां तोड़ रही हैं सरकारी इंजीनियरों को

बिजली क्षेत्र की निजी कंपनियां रिलायंस एनर्जी, टाटा पावर, जिंदल पावर, जेपी ग्रुप वगैरह अपनी बिजली परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए सरकारी क्षेत्र की कंपनियों एनटीपीसी और एनएचपीसी के इंजीनियरों और दूसर पेशेवरों को जमकर तोड़ रहे हैं। प्राइवेट बिजली कंपनियों के पास अनुभवी इंजीनियरों का जबर्दस्त अभाव है। यही वजह है कि ये कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र के इंजीनियरों को मुंहमांगा वेतन दे रही हैं। इनसे समयबद्ध प्रोमोशन का भी वादा किया जा रहा है। अगर बात पहले एनटीपीसी की करें तो पिछले करीब एक साल के दौरान इसके करीब 225 अनुभवी इंजीनियरों ने इसे अलविदा कह दिया। ये सभी महत्वूर्ण पदों पर काम कर रहे थे। एनएचपीसी को भी करारा झटका लगा। उसके लगभग 375 इंजीनियरों ने उसे अलविदा कह दी। एनटीपीसी के एक प्रमुख अधिकारी ने इस सचाई को क बूला है, पर सफाई भी दी कि एनटीपीसी विशाल कंपनी है। इससे हर साल 300-400 पेशेवरों के बाहर जाने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता। महत्वपूर्ण यह है कि चंदेक महीने पहले एनटीपीसी ने अखबारों में विज्ञापन दिया था कि उसके पुराने पेशेवर फिर से उससे जुड़ सकते हैं। मैनजमेंट की यह कोशिश कितनी कामयाब होती है यह समय बताएगा। इस बीच एसोचैम के एचआर मामलों के प्रमुख एमके गर्ग ने कहा कि इस ट्रेंड को तब ही रोका जा सकेगा जब सरकारी उपक्रम अपने वेतन को प्राइवेट सेक्टर जसा आकर्षक बनाएंगे। सूत्रों का कहना है कि वेतन आयोग की सिफारिशों के आने से पहले माना जा रहा था कि बेहतर वेतन और दूसरी सुविधाएं मिलने के बाद उपयरुक्त सरकारी कंपनियों से पेशेवरों का जाना बंद हो जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के इंजीनियर एवं अन्य पेशेवर बताते हैं कि वेतन में प्रस्तावित इजाफे के बाद भी इन पेशेवरों की सेलरी प्राइवेट सेक्टर में मिलने वाली सेलरी से बहुत कम रहेगी।

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