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अब रिटेल जंग आपके द्वार

देश में बढ़ती रिटेल चेन तथा उसके लिए कम पड़ती जगह को देख अब कुछ कंपनियां सीधे ग्राहक के घर का रुख करने जा रही हैं। गुड़गांव के पॉश इलाके में इन दिनों चटक नारंगी शर्ट, ब्लैक पैंट और नारंगी टोपी पहने सब्जी वेंडर सुबह-सुबह लोगों के घर-घर जाकर सब्जी खरीदने के लिए घंटी बजाते हैं। कम कीमत और फ्रेश होने के कारण इसकी बिक्री भी खुब हो रही है। कोल्ड चेन कंपनी एक्मे ने असंगठित मजदूरों को अब सब्जी बेचने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। यदि यह प्रोजेक्ट सफल हो जाता है तो गोदरा और आईटीसी भी इस क्षेत्र में उतरने का मन बना रही है। अर्नस्ट और यंग के पिनाकी रांन मिश्रा ने बताया कि बड़े शहरों में किराए के लिए जगह इतनी महंगी है कि उन्होंने सोचा क्यों न किसानों से खरीद कर सब्जियां सीधे ग्राहकों के घरों पर पहुंचाएं। फूड और ग्रोसरी सेग्मेंट में किराये से होनेवाली आय 20 प्रतिशत ज्यादा हो गई है। जबकि रिटेल चेन, जिसका मुख्य स्रोत किसान है, से खरीददारी करने और बेचने में 14 प्रतिशत का माíजन होता है। कोल्ड स्टोरा कंपनी को यह माíजन 30 प्रतिशत तक होता है। इसीलिए उन्होंने सोचा क्यों न इस लाभ का फायदा ग्राहको को उनके घर पर ही और कम कीमत में दूं। उन्होंने बताया कि रिटेल स्टोर में रखरखाव पर खर्च ज्यादा होता है और 12-14 प्रतिशत सब्जियां बर्बाद हो जाती हैं। यहां ऐसा नहीं है। बिक्री भी रिटेल स्टोर से कहीं ज्यादा होती है। बिग एप्पल के जीएम रात गुप्ता ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में फायदे कम और परशानियां अधिक होंगी। इसमें वजन का विश्वास, क्वालिटी, मात्रा तथा उनकी पसंद आदि में अंतर दिखेगा। निर्धारित समय भी आड़े आएगी। लाल महल-365 के सीईओ विकास श्रीवास्तव ने बताया कि कंसेप्ट अच्छा है लेकिन यह ट्रायल है। इसमें ग्राहकों को अपनी पसंद की वेरायटी नहीं मिलेगी। एक छोटी दुकान में भी करीब 40 वेरायटी तो होती ही हैं, जिसे रखना एक वेंडर के लिए मुश्किल होगा।

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