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अन्नालारा-अक्कालारा माने भाइयों और बहनों

राष्ट्रीय नेता बनना है तो हिन्दी चैनल पर बाइट आनी चाहिए। गठबंधन-राजनीति में कामयाब होना है तो भी आपको कायदे से हिन्दी बोलना आना चाहिए। मजबूरी ही सही पर दक्षिण के कई कद्दावार नेता और उभरते राजनीतिक सितारे ‘क’ से कलम और ‘द’ से दवात सीख रहे हैं। कई नेता काफी अच्छी हिन्दी बोल भी लेते हैं। फरवरी में आंध्र के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की जनसभा में मौजूद हाारों लोगों को हिन्दी में संबोधित किया। कुछ माह पहले राजधानी के एक पंचसितारा होटल की लॉबी में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जयललिता से एक हिन्दी चैनल के पत्रकार ने अपने सवाल का जवाब हिन्दी में मांगा तो उन्होंने उक्त पत्रकार से बेहतर हिन्दी बोलकर वहां मौजूद लोगों को चकित कर दिया।ड्ढr ड्ढr एक समय हिन्दी-विरोध के सबसे बड़े केंद्र रहे तमिलनाडु के कई बड़े राजनेताओं और उनके परिानों को अब हिन्दी बोलते-सीखते देखा जा सकता है।मुख्यमंत्री करुणानिधि की सुपुत्री कनीमोझी राजनीतिज्ञ के साथ कवयित्री भी हैं। राज्यसभा में आने के बाद वह भी हिन्दी बोलने की कोशिश कर रही हैं। केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री डा. अंबुमणि रामदास अपने सामाजिक न्याय एजेंडे के चलते उत्तर के पिछड़े-दलितों में भी खासे लोकप्रिय हुए हैं। पर वह हिन्दी में अभी ठीक से संवाद नहीं कर पाते। लेकिन दिल्ली के एक कान्वेंट की दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी हिन्दी में अव्वल रहती है। रामदास को एक नन्हा हिन्दी शिक्षक घर में ही मिल गया है।ड्ढr ड्ढr राज्यसभा में अन्नाद्रमुक नेता डा. मैत्रेयन सहित कई दक्षिण भारतीय नेता हिन्दी बोलने-समझने में सक्षम हैं। चिदम्बरम थोड़ी बहुत हिन्दी जानते हैं पर बोलते कम हैं। उनके युवा कांग्रेसी बेटे कार्तिक हिन्दी में दक्ष होने की कोशिश कर रहे हैं। स्टालिन के बेटे उदयनिधि भी हिन्दी सीख रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव तेलंगाना के थे। उनकी हिन्दी बेजोड़ थी।

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