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तो मास्साब,अब बच्चों को ऐसे पढ़ाएँ

नए सत्र में छात्रों से पहले हेडमास्टरों की ट्रेनिंग होगी। प्रधानाचार्यो को सिखाया जाएगा कि वह स्कूलों में लिखाई-पढ़ाई का माहौल तैयार करं। इस ट्रेनिंग में उन्हें टाइम मैनेजमेंट के अलावा सफलता के सूत्र भी बताए जाएँगे। उन्हें हरदम मुस्कुराते रहने का सबक भी सिखाया जाएगा। नए सत्र में मेधावी और कमजोर बच्चों को पहचान कर उन्हें उसी स्तर की शिक्षा देने का इंतजाम भी किया जा रहा है। बोर्ड परीक्षाएँ खत्म हो गई हैं। कॉपियाँ जाँचने का काम भी जल्द खत्म हो जाएगा। जुलाई के पहले हफ्ते से स्कूलों में पठाई-लिखाई का काम भी शुरू हो जाएगा। लेकिन इससे पहले शिक्षा विभाग इस साल प्रधानाचार्यो को ट्रेंड करना चाहता है ताकि स्कूलों में पढ़ाई का माहौल तैयार हो सके। यह ट्रेनिंग मंडल के सभी माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यो के लिए अनिवार्य होगी। इसमें हर जिले के कम से कम दस वित्त विहीन स्कूलों के प्रधानाचार्यो को भी शामिल किया जाएगा। मंडल स्तर पर प्रशिक्षण मई के अंतिम हफ्ते में और जिला स्तर पर ट्रेनिंग जून के अंतिम हफ्ते में तय की गई है। इन कार्यशालाओं में शिक्षाविदों को बुलाया जाएगा। शिक्षा निदेशक कृष्ण मोहन त्रिपाठी ने इसके लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं। इस निर्देश में प्रधानाचार्यो को टाइम मैनेजमेंट के बार में बताया गया है। प्रधानाचार्यो को सलाह दी गई है कि वह लम्बी वार्ताओं से बचें। आज का काम कल पर न टालें। एक समय एक काम करं,गलत कामों में न उलझें। निर्देशों में चरैवेति-चरैवेति का पाठ पढ़ाया गया है। इसमें कहा गया है कि लगातार प्रयास से मत हारिए। सफलता इसी में मिलेगी। प्रार्थना के साथ उन्हें हमेशा मुस्कुराते रहने की सलाह दी गई है।ं

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