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9 अप्रैल, 2020|4:10|IST

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विभाग ने नहीं बनाए तो कौन बना गया राशन कार्ड?

विभाग ने नहीं बनाए तो कौन बना गया राशन कार्ड?

कथित धर्मातरण से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए वेदनगर में फर्जी राशन कार्ड बांटे गए थे। पूरी बस्ती में सिर्फ तीन कार्ड विभाग ने बनाए हैं। शेष का जिला आपूर्ति विभाग के पास कोई रिकार्ड नहीं है।

यानि सभी कार्ड पूरी तरह फर्जी थे। इन्हें किसने बनाया। किसने बांटा। यह जांच का नया विषय बन गया है।

वेदनगर बस्ती में धर्मातरण की आग के बाद वर्मा, म्यांमार और बांग्लादेशी लोगों के रहने की पुष्टि हुई थी। जिसके बाद सरकारी एजेंसियां हरकत में आ गईं।

आगरा पुलिस की टीम भी पश्चिम बंगाल में कई जिलों की खाक छानती रही। नतीजा सिफर आया।

मामला ज्यादा गर्म हुआ तो भाजपा विधायक योगेन्द्र उपाध्याय ने जिला आपूर्ति विभाग से बस्ती के लोगों को जारी किए गए राशन कार्डो के बारे में जानकारी मांगी।

सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी का जवाब आ गया है। विभाग के मुताबिक वेदनगर में रहने वाले तीन लोगों के राशन कार्ड 2009 में बनाए गए थे।

यह कार्ड भी वेदनगर के पते पर नहीं बल्कि नगला भवानी के पते पर बनाए गए थे। इसके अलावा विभाग ने कोई कार्ड नहीं बनाया जबकि बस्ती के तमाम परिवारों के पास मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड थे।

साफ है कि बस्ती में बांटे गए राशन कार्ड पूरी तरह से फर्जी थे और आशंका है कि मतदाता पहचान पत्र भी फर्जी हो सकते हैं। अब सवाल ये है कि फर्जी कार्ड बनाने और बांटने वालों की मंशा क्या थी? जांच एजेंसियों के सामने अब यह नया सवाल खड़ा है।

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