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देश की जनगणना पर होगी दुनिया की नजर

वर्ष 2011 में होने वाली जनगणना को हाई टेक बनाया जा रहा है। जनगणना के दौरान नागरिकों की सूचनायें दर्ज करने के लिए इस बार तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया जायेगा। अनेक जानकारियों को समाहित करते हुए एक भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार किया जायेगा जिसका इस्तेमाल बहुउद्देशीय राष्ट्रीय पहचान-पत्र बनाने के लिए होगा। नागरिकों को दिया जाने वाला अपने किस्म का यह एक ऐसा पहचान-पत्र होगा जिसे सारी जानकारियों के लिए अधिकृत सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है। वर्ष 2011 तक देश की जनसंख्या एक अरब 21 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है। जनगणना अधिकारियों के अनुसार आबादी के नजरिये से चीन के बाद दुनिया के सबसे बड़े देश में होने वाली जनगणना में शामिल जानकारियां खासी उपयोगी और दिलचस्प होगी। जनगणना में देश की आबादी , कारोबार , शिक्षा , स्त्री-पुरुष अनुपात , अधिकृत जन्म तिथि ,वैवाहिक स्थिति ,स्थाई और स्थानीय पता , माता -पिता का पूरा नाम ,दिखने वाला चिन्ह ,उप नाम ,फिंगर प्रिंट ,तस्वीर , जन्म स्थान ,सेक्स और पहचान-पत्र जारी होने की तिथि आदि सूचनायें शामिल की जायेंगी। केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने वर्ष 2011 की जनगणना के लिए आंकडे एकत्र करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किए जाने की वकालत करते हुए गुरुवार को कहा कि सरकार इस बार जनगणना के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण कार्यक्रम भी शुरु किए जाने के प्रस्ताव पर गौर कर रही है। जनगणना के जरिये सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ गरीबी , संपन्नता ,बेकारी ,रोगार की स्थिति ,प्रति व्यक्ित आय आदि के बार में जरूरी जानकारियां उपलब्ध हो सकेंगी। 2011 की जनगणना पर दुनिया के देशों की नजर होगी क्योंकि दक्षिण एशिया में भारत तेजी से आर्थिक विकास की तरफ बढ़ रहा है। गृह राज्य मंत्री डा. शकील अहमद के अनुसार 2001 की जनगणना के आंकड़े तैयार करने में पांच वर्ष से अधिक का समय लगा था जबकि 2011 की जनगणना संबंधी आंकड़े दो-तीन वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है। पिछले जनगणना पर 1403 करोड़ रुपये का खर्च हुए थे। तब प्रति व्यक्ित पर 14 रुपये का खर्च आया था।

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